facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

भारत के टायर निर्यात ने बनाया नया रिकॉर्ड, लेकिन अमेरिका ने दे दिया बड़ा झटका

Advertisement

अमेरिका बना सबसे बड़ा बाजार, लेकिन बढ़े आयात शुल्क ने भारतीय टायर उद्योग की चिंता बढ़ाई

Last Updated- June 04, 2026 | 8:02 AM IST
tyre

भारत का टायर निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 27,312 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है, जिसमें अमेरिका सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बनकर उभरा है। एटमा ने बुधवार को वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों का हवाला देते हुए यह जानकारी दी। वित्त वर्ष 2024-25 में टायर का निर्यात 25,057 करोड़ रुपये था, जिसकी तुलना में इस वर्ष नौ प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

वाहन टायर विनिर्माता संघ (एटमा) के चेयरमैन अरुण मैमन ने कहा, ‘वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान, बढ़ी हुई लॉजिस्टिक लागत और प्रमुख बाजारों में व्यापार संबंधी अनिश्चितताओं के बावजूद निर्यात का प्रदर्शन मजबूत रहा है।’

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, अमेरिका भारतीय टायर के लिए सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बना रहा, जिसका मूल्य कुल निर्यात का 15 प्रतिशत यानी 4,082 करोड़ रुपये रहा। हालांकि, अमेरिकी बाजार की हिस्सेदारी पिछले वर्ष के 17 प्रतिशत से घट गई। यह कमी अगस्त, 2025 में अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारतीय टायर पर आयात शुल्क 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किए जाने के बाद आई।

एटमा ने कहा, ‘शुल्क में वृद्धि के कारण भारतीय टायर निर्यात को उन कई प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले नुकसान हुआ, जिन्हें कम शुल्क का लाभ मिलता रहा।

Advertisement
First Published - June 4, 2026 | 8:02 AM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement