विमानन कंपनी इंडिगो मई महीने के लिए अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की सीट क्षमता में फरवरी के मुकाबले 17 प्रतिशत तक की कटौती कर रही है। पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण हवाई यातायात में लगातार आ रही रुकावटों की वजह से ऐसा किया जा रहा है। वैश्विक विमानन परामर्श फर्म ओएजी के आंकड़ों और विश्लेषण के अनुसार खाड़ी देशों से बाहर वाली विमानन कंपनियों में से इंडिगो सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है।
हालांकि ओएजी के अनुसार इस बात की उम्मीद है कि विमानन कंपनी फरवरी के स्तरों की तुलना में जून (1.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी) और जुलाई (1.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी) के दौरान अपनी क्षमता में थोड़ा-सा सुधार करेगी। यह उम्मीद इस अनुमान पर आधारित है कि एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के दाम मुफीद हो जाएंगे। हालांकि केंद्र सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय मार्गों के लिए विमान ईंधन की दरों में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी किए जाने के बाद ऐसा होने की संभावना कम ही नजर आ रही है।
पश्चिम एशिया की स्थानीय विमानन कंपनियां सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं। फरवरी के मुकाबले मई में अपनी क्षमता में 34.3 प्रतिशत की कटौती के साथ एयर अरेबिया शीर्ष स्थान पर है। इसके बाद कतर एयरवेज, फ्लाईदुबई, एतिहाद एयरवेज और सऊदी अरेबियन एयरलाइंस का स्थान आता है। इंडिगो गैर-पश्चिम एशिया की पहली और 10 विमानन कंपनियों की सूची में छठी ऐसी विमानन कंपनी है, जिस पर युद्ध और उसके बाद के परिणामों से सबसे ज्यादा बुरा असर पड़ा है।
अलबत्ता एमिरेट्स की क्षमता में इंडिगो के मुकाबले काफी कम कटौती देखी गई है। दुनिया भर में सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाली शीर्ष 10 विमानन कंपनियों की सूची में शामिल अन्य गैर-पश्चिमी एशियाई विमानन कंपनियों में थाई एयरवेज (-9.3 प्रतिशत), पेगासस एयरलाइंस (-13.7 प्रतिशत) और एयर एशिया (-8.6 प्रतिशत) शामिल हैं। ये ऐसी विमानन कंपनियां है, जिनकी क्षमता में फरवरी के मुकाबले मई में कटौती हुई है।
क्षेत्रीय स्तर पर बात करें, तो भारत की अगुआई वाला दक्षिण एशिया दुनिया का ऐसा तीसरा क्षेत्र है जो ईरान-अमेरिका युद्ध के सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। यहां मई में अंतरराष्ट्रीय विमानन सीटों की कुल क्षमता फरवरी के आधारभूत आंकड़ों के मुकाबले लगभग 10 या 9.3 प्रतिशत कम हो गई।