इंडियन होटल्स और आईटीसी होटल्स जैसी देश की सूचीबद्ध होटल श्रृंखलाएं साल 2030 तक बाजार में 70,000 से ज्यादा कमरे जोड़ सकती हैं। यात्रा की दमदार मांग की बदौलत ऐसा हो सकता है। रियल एस्टेट क्षेत्र की परामर्श कंपनी सीबीआरई के नए अनुसंधान में यह अनुमान जताया गया है।
यह क्षेत्र वैश्विक महामारी के बाद सुधार के दौर से निकलकर अब ढांचागत परिपक्वता के दौर में प्रवेश कर रहा है। इस बात को ध्यान में रखते हुए कि रिपोर्ट में कहा गया है कि इस उद्योग के बाजार का आकार साल 2024 के लगभग 24.6 अरब डॉलर से बढ़कर साल 2029 तक 31 अरब डॉलर होने का अनुमान है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘संभावना है कि घरेलू पर्यटन इस वृद्धि का नेतृत्व करेगा। इसने साल 2025 में यात्राओं में सालाना आधार पर 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की और 4.1 अरब का आंकड़ा छुआ है।’
साल 2025 में आपूर्ति निर्णायक रूप से ‘महंगी’ श्रेणी की और चली गई है जो लग्जरी अनुभवों के लिए उपभोक्ताओं की बढ़ती चाहत पूरा कर रही हैं। साल के दौरान नए होटल-कमरे खुलने के मामले में अपर मिडस्केल, अपर अपस्केल और अपस्केल श्रेणियों की संयुक्त रूप से 60 प्रतिशत हिस्सेदारी रही।
सीबीआरई के चेयरमैन और मुख्य कार्य अधिकारी (भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका) अंशुमान मैगजीन ने कहा, ‘आतिथ्य-सत्कार क्षेत्र का यह सफर भारत की आर्थिक मजबूती का प्रमाण है, जिसे खर्च योग्य बढ़ती आय और बड़े स्तर पर हो रहे बुनियादी ढांचागत विकास से मिली बेहतर पहुंच का समर्थन प्राप्त है।’
भारतीय-पाकिस्तानी संघर्ष जैसे भू-राजनीतिक तनावों और विमानन क्षेत्र में परिचालन संबंधी रुकावटों के बावजूद इस क्षेत्र ने साल 2025 में पूरे साल विकास की जोरदार रफ्तार बनाए रखी।