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गैस की किल्लत और रसोइया गायब: शहरों में बढ़ी ‘रेडी-टु-ईट’ खाने की मांग, क्विक कॉमर्स की चांदी

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एलपीजी की कमी और घरेलू सहायकों के पलायन के चलते शहरी परिवारों ने 'रेडी-टु-ईट' विकल्पों और इंडक्शन कुकटॉप की ओर रुख किया है, जिससे क्विक कॉमर्स में उछाल आया है

Last Updated- March 29, 2026 | 10:17 PM IST
packaged food
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

रसोई गैस की आपूर्ति में कमी और घरेलू सहायकों के कुछ समय के लिए अपने प्रदेश लौट जाने के कारण घरों में खाना पकाने में व्यवधान आ गया है। लेकिन इस दिकक्त ने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर रेडी टु ईट (तुरंत खाई जाने वाली चीजों) सामान की मांग बढ़ा दी है। 

उद्योग के अधिकारियों का कहना है कि यह रुझान घबराहट में खरीदारी की ओर इशारा नहीं करता बल्कि यह एक धीरे-धीरे हो रहा व्यवहारिक बदलाव है क्योंकि शहरी परिवार सुविधाजनक और कम कोशिश वाले खाने के विकल्पों की ओर झुक रहे हैं। कई मामलों में घरेलू नौकर, जिनमें कई प्रवासी हैं, किराए के घरों में एलपीजी सिलिंडर मिलने में आ रही दिक्कतों के कारण अपने घरों को लौट गए हैं।  इस वजह से उनके मालिकों की अब रेडी टु ईट विकल्पों पर निर्भरता बढ़ गई है।

बिगबास्केट के चीफ़ मर्केंडाइजिंग ऑफिसर ​शिशु कुमार तिरुमला ने कहा, प्लेटफॉर्म पर रेडी टु ईट श्रेणी में सामान्य स्तर से करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी हो रही है। तिरुमला ने कहा, पिछले 5 दिनों में हमारे इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री बहुत अच्छी रही है, जो हमारे सामान्य बिजनेस एज़ यूजुअल (बीएयू) आंकड़ों  से करीब 10 गुना ज्यादा है। बाकी श्रेणियां, जिनमें रेडी टु ईट सामान शामिल हैं, की बीएयू वृद्धि 10 फीसदी से ज्यादा रही हैं।

फ्रेशकॉन इंडिया के सह-संस्थापक अनुपम बोकी ने बताया कि पिछले सात दिनों में कंपनी ने अपने गैस सेविंग सामान पर सामान्य उत्पादों की तुलना में लगभग दो गुना ज्यादा मांग देखी है। यह इस बात का संकेत है कि खाना पकाने के ज्यादा अधिक कुशल तरीकों में लोगों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। फ्रेशकॉन इंडिया एक डायरेक्ट टु कंज्यूमर प्लेटफॉर्म है और रेडी टु ईट सामान उपलब्ध कराता है। 

उन्होंने कहा, हम देख रहे हैं कि उपभोक्ता और फूड बिजनेस दोनों ही ज्यादा असरदार कुकिंग सामान को अपनाने का बढ़ता रुझान साफ तौर पर देख रहे हैं। भारत के सबसे बड़े इंटरनैशनल फूड और हॉस्पिटैलिटी मेले आहार में वितरक, निर्यातक और होरेका पार्टनरों ने फ्रेशकॉन के रेडी टु यूज़ फॉर्मेट में काफी दिलचस्पी दिखाई। ये फॉर्मेट कुकिंग का समय 80 फीसदी तक कम कर सकते हैं और 60 फीसदी तक गैस बचा सकते हैं। उन्होंने कहा, इसका असर अब फूड सर्विस सेक्टर से फ्रेशकॉन के लिए आने वाली पूछताछ में दिखना शुरू हो गया है।

एमेजॉन इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी इंस्टेंट नूडल्स, जूस, नट्स और प्रोटीन वाले स्नैक्स जैसी श्रेणियों में मांग में काफी बढ़ोतरी देख रही है।

प्रवक्ता ने कहा, पिछले कुछ हफ्तों में हमने जल्दी और आसानी से बनने वाले खाने के विकल्पों की मांग में काफी बढ़ोतरी देखी है क्योंकि लोग अब ऐसे विकल्पों की तलाश कर रहे हैं, जिनमें खाना बनाने में कम से कम समय लगे। ग्राहक एमेजॉन नाउ के जरिये तुरंत डिलिवरी का भी रुख कर रहे हैं, जिसके तहत दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और बेंगलूरु के कुछ हिस्सों में खाने-पीने की जरूरी चीजें कुछ ही मिनटों में डिलिवर हो जाती हैं। एमेजॉन ने एक खास ‘रेडी टु ईट स्टोर’ भी बनाया है, जिसमें जल्दी से बनने वाले खाने के कई विकल्प मौजूद हैं।

कंपनी के सूत्र ने बताया कि क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म जेप्टो में रेडी टु ईट चीजों की बिक्री में भी मामूली बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। हालांकि, उस व्यक्ति ने यह भी कहा कि यह बढ़ोतरी बहुत बड़ी नहीं है।

कंज्यूमर इनसाइट्स फर्म डेटम इंटेलिजेंस के संस्थापक सतीश मीणा के अनुसार, शुरुआती रुझान किसी तरह के तत्कालिक बदलाव का संकेत नहीं देते हैं, लेकिन चौथे सप्ताह (पश्चिम एशिया संघर्ष के) में मांग में एक उल्लेखनीय अंतर दिखाई दे सकता है। ऐसा इसलिए कि रेस्तरां अपना काम जारी रखने के लिए जूझ रहे हैं और शहरी घरों में घरेलू कामगारों से जुड़ी स्थितियां भी बदल रही हैं, जिसमें घरेलू सहायकों का हिस्सा संभवतः अपने गृह नगरों को लौट गया है।

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First Published - March 29, 2026 | 10:17 PM IST

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