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पश्चिम एशिया युद्ध का असर! भारत के चाय निर्यात पर बढ़ा संकट

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पश्चिम एशिया तनाव के कारण शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम बढ़े

Last Updated- May 21, 2026 | 9:30 AM IST
Tea Export

पश्चिम एशिया संकट के कारण इस वर्ष जनवरी-मार्च के दौरान चाय निर्यात में पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले गिरावट आई है। यह स्थिति देश के उत्तर और दक्षिण क्षेत्रों में देखने को मिली है। भारत से चाय का लगभग 46 प्रतिशत निर्यात इराक, यूएई, ईरान, सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र जैसे बाजारों के लिए होता है।

इंडियन टी एसोसिएशन (आईटीए) ने कहा कि खाड़ी क्षेत्रों में कई माह से भू-राजनीतिक तनाव गहराने, प्रमुख शिपिंग मार्गों में व्यवधान आने, बीमा प्रीमियम बढ़ने और मुद्रा अस्थिरता के कारण भारत की चाय निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में बड़ी चुनौती आई है। चाय उत्पादकों के इस महत्त्वपूर्ण निकाय ने कहा कि निर्यात किया जाने वाला माल अब लंबी दूरी के मार्गों से भेजा जा रहा है, जिससे ढुलाई लागत बढ़ गई है।

आईटीए ने कहा, ‘माल ढुलाई कंपनियों ने भारत से विभिन्न देशों को जाने वाले कार्गो पर आपातकालीन ईंधन अधिभार (ईएफएस) लगाना भी शुरू कर दिया है, जिससे निर्यात लागत में और वृद्धि हो गई है।’ आईटीए के महासचिव अरिजित राहा ने कहा कि कार्गो आवाजाही तो जारी है, लेकिन व्यापार करने की समग्र लागत में काफी वृद्धि हो गई है। अंतरराष्ट्रीय हालात अनिश्चित बने हुए हैं। इससे चिंता छाई हुई है। टी बोर्ड के आंकड़ों से पता चला है कि इस वर्ष जनवरी-मार्च के दौरान चाय निर्यात 692 लाख किलोग्राम की तुलना में 5.46 लाख किलोग्राम तक गिर गया है। फरवरी के अंत में ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल संघर्ष का असर निर्यात पर दिख रहा है। निर्यात में आने वाली चुनौतियों के साथ आईटीए ने 21 मई को अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस से पहले तमाम बाधाओं से निपटने के लिए समन्वित हस्तक्षेप की मांग की है।

जनवरी-मार्च के दौरान जलवायु संबंधी चुनौतियों के कारण असम और पश्चिम बंगाल समेत उत्तर भारत में उत्पादन लगभग 12.10 प्रतिशत तक गिर गया, लेकिन राहा ने कहा कि एसोसिएशन के सदस्यों से मिली प्रतिक्रिया से पता चलता है कि अप्रैल में भी असम में उत्पादन गिरा है जबकि पश्चिम बंगाल में इस दौरान कुछ सुधार देखने को मिला है। उन्होंने कहा, ‘दार्जिलिंग को छोड़ दें तो असम और पश्चिम बंगाल में अधिकांश उत्पादकों के लिए मई का महीना बेहतर रहा है।’

जनवरी से अप्रैल के दौरान उत्तर भारत के नीलामी मूल्यों का औसत 183.56 रुपये प्रति किलोग्राम रहा, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह 169.46 रुपये प्रति किलोग्राम था। अखिल भारतीय स्तर पर 2026 में नीलामी मूल्यों का औसत 168.47 रुपये प्रति किलोग्राम रहा, जबकि 2025 में यह 159.79 रुपये प्रति किलोग्राम था।

आईटीए ने इस वृद्धि का श्रेय आपूर्ति-मांग की गतिशीलता को दिया है। चाय उत्पादन और उसके निर्यात के मोर्चे पर उभरी चुनौतियों से निपटने के लिए एसोसिएशन ने सरकार से नीतिगत हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। इसमें उत्पादन लागत और गुणवत्ता से जुड़े न्यूनतम मूल्य निर्धारण तंत्र की स्थापना करने की मांग की गई है। आईटीए के अनुसार, यह न्यूनतम आयात मूल्य के मामले में भी काम कर सकता है।

यही नहीं, एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि उन्हें सरकारी कल्याण और जलवायु सहायता योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए तथा पारंपरिक चाय उत्पादन के लिए समर्थन और मौजूदा रोड-डी-टीईपी दरों में वृद्धि की जाए। एसोसिएशन दार्जिलिंग चाय क्षेत्र के लिए समर्पित वित्तीय राहत पैकेज की भी मांग कर रहा है। चाय के लिए प्रसिद्ध रहा यह क्षेत्र अब लगातार गिरते उत्पादन की चुनौती से जूझ रहा है। चाय की कीमतों में भी 2018 से 2024 के बीच नकारात्मक सीएजीआर दर्ज किया गया, जिससे उद्योग पर दबाव और बढ़ गया है।

 

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First Published - May 21, 2026 | 9:30 AM IST

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