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अब बड़े पैमाने पर बन सकेंगी ग्रीन पावर परियोजनाएं, नियम हुए आसान

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कंपनियों को मिली राहत, अब ग्रुप कैप्टिव प्रोजेक्ट्स होंगे ज्यादा आसान

Last Updated- March 17, 2026 | 8:39 AM IST
Renewable Energy

निजी इस्तेमाल वाले (कैप्टिव) बिजली संयंत्रों के लिए बिजली नियम 2005 में किए गए ताजा संशोधन से कैप्टिव अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं को ज्यादा व्यावहारिक बनाने में मदद मिलेगी। उद्योग का कहना है कि इससे बड़े पैमाने पर अक्षय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और स्वच्छ ऊर्जा के विकास और उसे अपनाने में तेजी आएगी।

सरकार ने बिजली (संशोधन) नियम, 2026 को अधिसूचित किया है, ताकि कैप्टिव बिजली उत्पादन के ढांचे को आधुनिक कॉर्पोरेट समूहों के अनुरूप बनाया जा सके। साथ ही अनुपालन, जवाबदेही और स्पष्टता के साथ कैप्टिव पॉवर के लाभों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित हो सके।

कंपनियां गैर जीवाश्म ईंधन पर आधारित कैप्टिव पॉवर संपत्तियों के लिए समर्पित सहायक इकाइयां या विशेष उद्देश्य इकाइयां (एसपीवी) बनाती हैं, जिनकी बिजली का इस्तेमाल समूह की कंपनियां मिलकर करती हैं। बिजली मंत्रालय ने आज कहा कि मौजूदा कैप्टिव उपभोग नियमों की संकीर्ण व्याख्या के कारण समूह की वैध इकाइयां भी कैप्टिव बिजली का इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं, भले ही उन्होंने इसमें काफी निवेश किया हो।

संशोधनो प्रस्ताव पिछले साल सितंबर में रखा गया था। नए नियम में मालिकाना के प्रावधानों को साफ किया गया है। साथ ही ग्रुप कैप्टिव व्यवस्था के नियम सरल किए गए हैं और सत्यापन की स्पष्ट व्यवस्था बनाई गई है। मंत्रालय के अनुसार जून 2023 में पूंजी संरचना में अधिक लचीलेपन की अनुमति देकर समूह की कंपनियों तक कैप्टिव उपभोग के लाभों का विस्तार करने के लिए नियमों में संशोधन किया गया था, लेकिन व्याख्या संबंधी समस्याएं बनी रहीं। साथ ही व्यक्तियों के संघ (एओपी) पर लागू होने वाली आनुपातिकता जरूरत से जुड़ी चुनौतियां भी थीं। एओपी किसी उत्पादन केंद्र के स्वामित्व, संचालन और रखरखाव करने के लिए बनाई जाने वाली विशेष उद्देश्य इकाई है।

इस संशोधन को सकारात्मक कदम बताते हुए ट्रूआरई ओरियाना पॉवर के संस्थापक, एमडी और सीईओ रूपल गुप्ता ने कहा कि इससे ग्रुप कैप्टिल रिन्यूएबल परियोजनाएं ज्यादा व्यावहारिक और बड़े पैमाने वाली बन सकेंगी। उन्होंने कहा, ‘51 प्रतिशत उपभोग की आवश्यकता को व्यक्तिगत रूप से पूरा करने के बजाय सामूहिक रूप से पूरा करने की अनुमति देने से अनुपालन जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी और डेवलपर्स तथा उपभोक्ताओं को अधिक लचीलापन मिलेगा। यह ऐसी परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता और बैंक से ऋण मिलने की संभावना को बेहतर बनाने में भी मदद कर सकता है।’

कैप्टिव बिजली उत्पादन से उद्योगों को भरोसेमंद, उच्च गुणवत्ता वाली और किफायती बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित होती है। इससे जुड़े नियमों को आसान बनाने से उद्योगों के लिए अक्षय ऊर्जा अपनाना आसान होगा।

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First Published - March 17, 2026 | 8:39 AM IST

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