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रेयर अर्थ मैग्नेट के लिए चीन ने देना शुरू किया लाइसेंस, भारत के ऑटो और EV उद्योग को बड़ी राहत

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सरकारी अधिकारियों ने बताया कि चीनी प्राधिकारी भारतीय कंपनियों के साथ विदेशी कंपनियों की भारतीय इकाइयों को धीरे-धीरे लाइसेंस जारी कर रहे हैं

Last Updated- December 26, 2025 | 6:30 PM IST
rare earth
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

चीन ने भारत में रेयर अर्थ मैग्नेट (आरआईएम) के आयात के लिए लाइसेंस जारी करना शुरू कर दिया है। सरकारी अधिकारियों ने बताया कि चीनी प्राधिकारी भारतीय कंपनियों के साथ विदेशी कंपनियों की भारतीय इकाइयों को धीरे-धीरे लाइसेंस जारी कर रहे हैं।

इस सूची में शामिल कुछ कंपनियों में जय उशीन, वाहन के कल पुर्जे बनाने वाली जर्मन कंपनी कॉन्टिनेंटल एजी की भारतीय इकाइयां, महिंद्रा के डीलर या वेंडर, मारुति सुजुकी के डीलर या वेंडर, और होंडा स्कूटर ऐंड मोटरसाइकिल के आपूर्तिकर्ता या वेंडर शामिल हैं।

एक अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘हालांकि यह धीमी शुरुआत है, लेकिन चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने आवेदनों को पर काम करना और उन्हें मंजूरी देना शुरू कर दिया है। कुछ कंपनियों को आवश्यक अनुमोदन प्राप्त हुए हैं। प्रक्रिया अब शुरू हो गई है।’ आरईएम के वैश्विक उत्पादन और इसकी क्षमता के मामले में चीन का दबदबा है। चीन ने 4 अप्रैल से इसके निर्यात प्रतिबंध लगा रखा है।

वाहन और वाहनों के कल पुर्जे, इलेक्ट्रॉनिक्स, चिकित्सा उद्योग सहित रक्षा जैसे उद्योगों के लिए रेयर अर्थ मैग्नेट महत्त्वपूर्ण हैं।

अमेरिका द्वारा चीनी उत्पादों पर बढ़े हुए शुल्क लगाए जाने के जवाब में चीन ने निर्यात लाइसेंसिंग मानदंड लगाए थे, लेकिन दुनिया भर के देश इन प्रतिबंधों से प्रभावित हो रहे हैं।

 नियमों के तहत अगर आयातक यह गारंटी देते हैं कि सामग्रियों का कोई दोहरा इस्तेमाल या रक्षा संबंधी उपयोग नहीं होगा, तो चीनी विक्रेताओं को अब निर्यात मंजूरी मिलेगी। हालांकि यह प्रक्रिया जटिल और लंबी है।

मारुति सुजूकी और महिंद्रा ऐंड महिंद्रा ने बिज़नेस स्टैंडर्ड के सवालों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। जय उशीन, कॉन्टिनेंटल एजी, होंडा स्कूटर  ऐंड मोटरसाइकिल ने ईमेल किए गए सवालों का जवाब नहीं दिया।

भारत के वाहन उद्योग ने चीन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों पर भारत सरकार के समक्ष चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि चीन के वाणिज्य मंत्रालय से इन महत्त्वपूर्ण कच्चे माल के आयात को मंजूरी देने में देरी से इलेक्ट्रिक वाहनों सहित भारतीय वाहन निर्माताओं के उत्पादन पर विपरीत असर पड़ रहा है।

महत्त्वपूर्ण कच्चे माल के शिपमेंट के लिए आवेदनों पर कार्यवाही में देरी को लेकर भारत सरकार ने पिछले 6 महीनों के दौरान चीनी प्राधिकारियों से कई बार बात की है।  जून में नई दिल्ली दौरे के दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से वादा किया था कि चीन रेयर अर्थ मिनरल्स के साथ अन्य वस्तुओं के निर्यात प्रतिबंधों में ढील देगा।  

सरकारी अधिकारियों ने कहा कि आवेदनों के प्रसंस्करण में व्यवधान और देरी के बावजूद उद्योग जगत इसके प्रबंधन और उत्पादन जारी रखने का तरीका खोजने में सफल रहा है। इस बीच पिछले महीने केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कई उद्योगों के लिए महत्त्वपूर्ण कच्चे माल के आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए रेयर अर्थ मैग्नेट्स के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए 7,280 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है।

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First Published - December 26, 2025 | 6:44 AM IST

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