भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक शुरू हो चुकी है और बाजार की नजर ब्याज दरों पर टिकी हुई है। इस बीच, देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई के चेयरमैन सीएस सेटी ने कहा है कि फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करना अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर रहेगा। उनका मानना है कि इससे आर्थिक हालात स्थिर रहेंगे और विकास की रफ्तार बनी रहेगी।
बुधवार को सिटी इंडिया कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए सेटी ने कहा कि बाजार भी इस बार ब्याज दरों में ‘पॉज’ की उम्मीद कर रहा है। उन्होंने कहा कि महंगाई पर नजर रखना जरूरी है, लेकिन इस समय दरों में स्थिरता अर्थव्यवस्था के लिए मददगार साबित हो सकती है। सेटी ने निवेशकों से भी अपील की कि वे शेयर बाजार के रोजाना उतार-चढ़ाव को देखकर फैसले न लें। उन्होंने कहा कि भारत को एक लंबी अवधि के अवसर के तौर पर देखना चाहिए। उन्होंने कहा, “सिर्फ सेंसेक्स को मत देखिए, भारत की पूरी विकास कहानी को देखिए।”
सेटी के मुताबिक, दुनिया इस समय कई चुनौतियों से गुजर रही है। भू-राजनीतिक तनाव, बदलती सप्लाई चेन, नई तकनीकों का बढ़ता असर और पूंजी के बदलते प्रवाह के बीच भारत स्थिरता और अवसर का केंद्र बनकर उभरा है। भारत के डिजिटल ढांचे की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) देश की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। उनके मुताबिक, यूपीआई पर हर महीने करीब 20 अरब लेनदेन होते हैं, जिनमें लगभग 30 फीसदी हिस्सेदारी एसबीआई की है। बैंक की तकनीकी विफलता दर सिर्फ 0.01 फीसदी है।
सेटी ने कहा कि जन धन खाते, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी वाली जैम (JAM) व्यवस्था और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) ने देश में वित्तीय समावेशन को नई ताकत दी है। इससे सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लोगों तक पहुंच रहा है और बीच में होने वाली गड़बड़ियां काफी हद तक खत्म हुई हैं। उन्होंने कहा कि अब गांवों और छोटे शहरों में भी लोगों की बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच बढ़ी है। खासकर महिलाओं और छोटे कारोबारियों को इसका फायदा मिला है।
देश में तेजी से बढ़ रहे इंफ्रास्ट्रक्चर पर बात करते हुए सेटी ने कहा कि हर राजमार्ग, हवाई अड्डे, मेट्रो परियोजना, लॉजिस्टिक कॉरिडोर और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना के पीछे बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। भारतीय बैंक इन परियोजनाओं को वित्तीय मदद देने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
एसबीआई के आंतरिक आकलन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भारत को 2030 तक करीब 200 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की जरूरत होगी। वहीं बुनियादी ढांचा, विनिर्माण, ऊर्जा परिवर्तन, शहरी विकास, एमएसएमई और नवाचार जैसे क्षेत्रों में करीब 450 लाख करोड़ रुपये और निवेश करने होंगे। सेटी ने कहा कि ग्रामीण समृद्धि, तेजी से हो रहा शहरी विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण भारत की विकास यात्रा की प्रमुख जरूरतें हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भले ही भारत के पास अभी दुनिया की सबसे बड़ी एआई कंपनियां न हों, लेकिन एआई का इस्तेमाल करने वालों की संख्या के मामले में भारत दुनिया में सबसे आगे निकल सकता है। उन्होंने कहा, “मुझे पूरा भरोसा है कि एआई के सबसे बड़े उपयोग और अपनाने वाला देश भारत होगा।”
सेटी ने बताया कि एसबीआई पहले से ही पर्सनल लोन जैसे क्षेत्रों में एआई आधारित मॉडल का इस्तेमाल कर रहा है। बैंक ने जिम्मेदार एआई के सिद्धांतों को भी काफी पहले अपना लिया था। उन्होंने कहा कि एसबीआई के 53 करोड़ ग्राहक हैं, जिनमें जीरो बैलेंस खाते वाले ग्राहक से लेकर बेहद संपन्न ग्राहक तक शामिल हैं। ऐसे में भविष्य में एआई आधारित व्यक्तिगत सेवाएं बैंकिंग का अहम हिस्सा बन जाएंगी। कर्ज की मांग पर उन्होंने कहा कि छोटे और मझोले उद्योगों समेत सभी क्षेत्रों में ऋण की मांग मजबूत बनी हुई है। इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) के तहत भी काफी लोग बैंक से संपर्क कर रहे हैं।
विलय और अधिग्रहण (एमएंडए) से जुड़ी फंडिंग पर उन्होंने कहा कि एसबीआई भारतीय और विदेशी बैंकों के साथ मिलकर ऐसे सौदों पर काम कर रहा है। एक सौदा पूरा हो चुका है, दूसरा प्रक्रिया में है और जल्द ही एक और महत्वपूर्ण सौदा पूरा होने की उम्मीद है।