एल्युमीनियम तेजी से अगली पीढ़ी के विनिर्माण में रणनीतिक सामग्री बन रही है। एक सेमीनार के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि ओडिशा जैसे राज्यों को अपने बॉक्साइट संसाधनों को जल्द से जल्द क्रियाशील बनाने और उन्हें निचले स्तर की मूल्य श्रृंखलाओं से जो़ड़ने की जरूरत है।
विशेषज्ञों ने कहा कि वित्त वर्ष 2025 में भारत ने करीब 45 लाख टन बॉक्साइट का आयात किया, जिसकी वजह से करीब 4,000 से 5,000 करोड़ रुपये विदेशी मुद्रा का बोझ पड़ा। वहीं वित्त वर्ष 2026 में तैयार एल्युमीनियम का आयात 70,000 करोड़ रुपये के पार चला गया है। इससे खनिज की उपलब्धता के बावजूद भारी आर्थिक बोझ का पता चलता है और इससे क्षेत्रीय विकास, औद्योगिक वृद्धि और रोजगार की संभावनाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
थिंक चेंज फोरम में बोलते हुए इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस के पू्र्व कंट्रोलर जनरल आरके सिन्हा ने कहा कि मजबूत औद्योगिक केंद्र और एल्युमीनियम केंद्र बनने के लिए ओडिशा के पास पर्याप्त संसाधन मौजूद है।