पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच वाणिज्यिक सिलिंडर की कीमतों में वृद्धि का हवाला देते हुए दिल्ली के बहादुर शाह जफर मार्ग पर एक दुकान में चाय के छोटे कप की कीमत 10 रुपये से 15 रुपये यानी सीधे 50 प्रतिशत बढ़ा दी है। हालांकि, उसने बड़े कप के दाम नहीं बदले हैं। कुछ उत्पादों की कीमतें बढ़ाना जबकि अन्य को जस का तस रखना, विक्रेता ने बेहद सतर्कता से यह बदलाव किया, जो कारोबार में बने रहने और अपनी लागत निकालने के लिए कियोस्क और रेस्टोरेंट मालिकों के सामान्य व्यवहार को दर्शाता है।
इस साल तीन महीने के भीतर ही चौथी बार मूल्य वृद्धि हुई है। ऐसे में बड़े कारोबारी संस्थान तो बढ़ी कीमतों को कुछ समय के लिए स्वयं वहन कर सकते हैं लेकिन छोटे प्रतिष्ठान लंबे समय तक ऐसा नहीं कर पाएंगे। फूड डिलिवरी प्लेटफॉर्म पहले ही सिलेंडर की बढ़ी हुई लागत का हवाला देकर अपने यहां कीमतें बढ़ा चुके हैं।
उद्योग के अनुमानों के अनुसार, 2026-27 से असंगठित क्षेत्र की हिस्सेदारी आधे से नीचे गिर सकती है, लेकिन 2027-28 में यह 47 प्रतिशत पर बनी रहेगी। तेल विपणन कंपनियों ने 1 अप्रैल से चार मेट्रो शहरों में एक वाणिज्यिक सिलिंडर पर 194 से 203 रुपये बढ़ाए हैं। युद्ध की शुरुआत के बाद से अब तक इन शहरों में सिलिंडर पर 338-363.5 रुपये तक बढ़ चुके हैं और दिसंबर 2025 की कीमतों की तुलना में इस वर्ष अब तक प्रति सिलिंडर लगभग 500 रुपये या उससे अधिक की वृद्धि हुई है। आधिकारिक आंकड़े अभी तक रेस्टोरेंट में मिलने वाले उत्पादों की कीमतों पर ईंधन मूल्य वृद्धि के किसी बड़े मुद्रास्फीति प्रभाव को नहीं दिखाते हैं, क्योंकि डेटा केवल फरवरी 2026 तक उपलब्ध है।