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भीषण गर्मी का कपड़ा उद्योग पर वार! फैक्ट्रियों का उत्पादन 10% तक घटा, श्रमिकों की सेहत पर भी संकट

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एनवाईयू स्टर्न सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार, भीषण गर्मी और उमस के कारण भारत के कपड़ा कारखानों में उत्पादन 10% तक घटा और श्रमिकों की स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ीं।

Last Updated- June 10, 2026 | 9:10 AM IST
Textile Industry
Representative image

न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के स्टर्न सेंटर फॉर बिजनेस ऐंड ह्यूमन राइट्स द्वारा मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भीषण गर्मी और उमस श्रमिकों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं और प्राइमार्क, डी-मार्ट, टारगेट, मार्क्स ऐंड स्पेंसर, टेस्को, टॉमी हिलफिगर और नेक्स्ट जैसे ब्रांडों को परिधान की आपूर्ति करने वाले कपड़ा कारखानों में उत्पादकता को 10 प्रतिशत तक बाधित कर रही हैं।

यह रिपोर्ट तमिलनाडु, हरियाणा, ओडिशा, महाराष्ट्र और कर्नाटक में स्थित 10 कपड़ा कारखानों का दौरा करने के बाद तैयार की गई है।

ये निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के उस वक्तव्य के बाद सामने आए हैं जिसमें कहा गया है कि वैश्विक कामकाजी आबादी का 70 प्रतिशत, यानी 24.1 अरब कामगारों के हर साल अत्यधिक गर्मी से पीडि़त होने की आशंका रहती है। इसके कारण प्रतिवर्ष 230 लाख गैर-घातक चोटें और 19,000 मौतें होती हैं।

भारत विश्व का छठा सबसे बड़ा वस्त्र निर्यातक है। वह बढ़ते तापमान के आर्थिक प्रभावों को पहले ही महसूस कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, गर्मी से संबंधित खर्चों की वजह से कामगारों को प्रति माह लगभग 500-1,000 रुपये का नुकसान हो रहा है, जो उनकी औसत मासिक मजदूरी (लगभग 11,500-18,000 रुपये) का एक बड़ा हिस्सा है। आपूर्तिकर्ताओं ने कहा कि यदि ब्रांड तकनीकी सहायता प्रदान करें या लागत साझा करें, तो वे गर्मी से बचाव के उपायों में अधिक निवेश करने को तैयार हैं। सर्वेक्षण में शामिल 94.1 प्रतिशत परिधान और जूते के ब्रांडों ने कहा कि अत्यधिक गर्मी उत्पादन के लिए मध्यम या भारी जोखिम पैदा करती है, लेकिन केवल 35.3 प्रतिशत ही आपूर्तिकर्ताओं से उत्पादन क्षेत्रों के अंदर तापमान या उमस मापने की अपेक्षा करते हैं, और कोई भी ब्रांड इस तरह का डेटा लगातार एकत्र नहीं करता है।

इसमें कहा गया है, ‘नौ कारखानों के प्रबंधकों ने बताया कि गर्मियों के चरम महीनों के दौरान उत्पादकता में लगभग 3 प्रतिशत से 10 प्रतिशत की कमी और अनुपस्थिति में लगभग 2 प्रतिशत से 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।’

रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि ब्रांडों को इन क्षेत्रों में अधिक निवेश करने पर विचार करना चाहिए। रिपोर्ट में वैश्विक परिधान ब्रांडों और खरीदारों से स्वैच्छिक दिशा-निर्देशों से आगे बढ़कर अत्यधिक गर्मी को कार्यस्थल सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक मापने योग्य जोखिम के रूप में मानने का आह्वान किया गया है।

एनवाईयू स्टर्न सेंटर फॉर बिजनेस ऐंड ह्यूमन राइट्स में वैश्विक श्रम की वरिष्ठ शोध वैज्ञानिक लूसी सियर्स ने कहा, ‘कारखानों का उत्पादन घट रहा है, गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और डिलिवरी की समय-सीमा खतरे में है, यह भविष्य की स्थिति नहीं बल्कि अभी की स्थिति है। जो ब्रांड हीट मॉनिटरिंग को अनिवार्य बनाते हैं, खरीद प्रक्रियाओं में बदलाव करते हैं और अनुकूलन की लागत साझा करते हैं, वे अधिक लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण करेंगे।’

इसमें कहा गया है कि अप्रैल 2024 में भीषण गर्मी के दौरान फरीदाबाद की एक निटवेयर फैक्टरी में बिजली कटौती और जनरेटर के ओवरलोड होने के कारण तीन उत्पादन तलों में से एक को अस्थायी रूप से बंद करना  पड़ा।

रिपोर्ट में पाया गया कि कुछ रंगाई और प्रसंस्करण इकाइयों में गर्मी के चरम महीनों के दौरान आंतरिक तापमान 43-45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो पहले से ही खतरनाक बाहरी तापमान से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक था। श्रमिकों ने चक्कर आने, सिरदर्द, निर्जलीकरण, बेहोशी, गर्मी से होने वाले चकत्ते, गुर्दे और मूत्र संबंधी समस्याओं के साथ-साथ गर्मी से संबंधित अनुपस्थिति के कारण बढ़े हुए चिकित्सा खर्च और वेतन हानि की शिकायत की।
तीन कारखानों से प्राप्त चिकित्सा कक्ष के आंकड़ों से पता चला कि स्थानीय स्तर पर भीषण गर्मी के दौरान स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों में अनुमानित मौसमी वृद्धि होती है।

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First Published - June 10, 2026 | 9:10 AM IST

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