इस महीने भारत के बाजार में 50 से ज्यादा सेमाग्लूटाइड-आधारित जेनेरिक दवाएं आने वाली हैं। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि स्पेशलिस्ट के अलावा कंसल्टिंग चिकित्सकों की दवा लिखने यानी प्रिस्क्राइबिंग का दायरा बढ़ने से थेरेपी ड्रॉपआउट यानी इलाज छोड़ने में इजाफा हो सकता है। इसलिए इसे रोकने के लिए मरीज के सख्त प्रोफाइल की जरूरत हो सकती है।
दिल्ली के एक एंडोक्रिनोलॉजिस्ट ने कहा, ‘ब्रांडेड जेनेरिक दवाओं के साथ, ग्लूकागोन-लाइक पेप्टाइड (जीएलपी-1) एगोनिस्ट जैसी मोटापा रोधी दवाओं को लिखने का दायरा बढ़ जाएगा और एंडोक्रिनोलॉजिस्ट जैसे स्पेशलिटी और सुपर-स्पेशलिटी डॉक्टरों से लेकर कंसल्टिंग फिजिशियन (सीपी) और जनरल प्रैक्टिशनर्स (जीपी) भी इन्हें लिखेंगे।’ उन्होंने कहा कि चूंकि दवा लिखने वालों का आधार काफी बढ़ जाएगा, इसलिए इसके लिए मरीज की सख्त प्रोफाइलिंग और थेरेपी जरूरतों और जीवनशैली में बदलाव की निगरानी की आवश्यकता होगी।
जीएलपी-1 एगोनिस्ट ऐसी दवाओं का एक वर्ग है जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करने और पेट भरा-भरा बताकर वजन घटाने में मदद करता है। इससे टाइप 2 मधुमेह और मोटापे के लिए ग्लूकोज नियंत्रण में सुधार होता है।