सोमवार को स्पाइसजेट ने दिल्ली हाई कोर्ट से गुहार लगाई कि उसे एक निर्देश से तत्काल राहत दी जाए। इस निर्देश के तहत स्पाइसजेट को अपने पूर्व प्रमोटर कलानिधि मारन और काल एयरवेज के साथ चल रहे लंबे विवाद के सिलसिले में 144.5 करोड़ रुपये जमा करने को कहा गया था। स्पाइसजेट ने चेतावनी दी कि इस आदेश पर अमल करने से एयरलाइन वित्तीय संकट में फंस सकती है।
किफायती एयरलाइन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि एयरलाइन की मौजूदा वित्तीय स्थिति को देखते हुए, तय समय-सीमा के भीतर जमा राशि की शर्त को पूरा करना असंभव है। उन्होंने यह तर्क दिया कि इस चरण पर भुगतान के लिए जोर देने से एयरलाइन के कामकाज में गंभीर बाधा आ सकती है, जिससे उड़ानें रद्द हो सकती हैं और स्थिति और भी ज्यादा बिगड़ सकती है।
यह विवाद वर्ष 2015 के एक शेयर हस्तांतरण समझौते से जुड़ा है। 2025 में स्पाइसजेट का अधिग्रहण उसके वर्तमान प्रमोटर अजय सिंह ने मारन परिवार से किया था।
वारंट और वित्तीय देनदारियों को लेकर बाद में हुए मतभेदों के कारण मध्यस्थता की कार्यवाही हुई, जिसके परिणामस्वरूप मारन के पक्ष में फैसला आया।