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यूरिया उत्पादन पर संकट: गैस की कमी से आधी क्षमता पर चल रहे संयंत्र, खेती पर पड़ सकता है असर

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पश्चिम एशिया संकट के कारण एलएनजी की आपूर्ति बाधित होने से भारत के यूरिया संयंत्र आधी क्षमता पर काम कर रहे हैं, जिससे उत्पादन घटने और लागत बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है

Last Updated- March 22, 2026 | 10:23 PM IST
Urea
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

पश्चिम एशिया संकट के बीच ‘अपरिहार्य स्थिति’ की घोषणा के चलते तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति बाधित होने से देश के यूरिया संयंत्र अपनी आधी क्षमता पर परिचालन कर रहे हैं। उद्योग सूत्रों ने बताया कि देश का सबसे बड़ा एलएनजी प्राप्त करने वाला टर्मिनल चलाने वाली पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड ने अपरिहार्य स्थिति की घोषणा की है। 

आपूर्तिकर्ताओं ने होर्मुज स्ट्रेट में व्यवधान की वजह से कंपनी को अनुबंधित मात्रा में गैस की आपूर्ति करने में असमर्थता जताई है। इस कदम से सरकारी गैस वितरक कंपनियों गेल (इंडिया) लिमिटेड, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसी) और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) ने आपूर्ति में कटौती शुरू कर दी है। ये कंपनियां रासगैस अनुबंध के तहत उर्वरक इकाइयों को गैस की आपूर्ति करती हैं।

उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘गैस आपूर्ति सामान्य स्तर से घटाकर 60-65 प्रतिशत तक कर कर दी गई है।’

उन्होंने कहा कि कुछ इकाइयों के लिए प्रभावी आपूर्ति 50 प्रतिशत से नीचे आ गई है। इस वजह से, जिन संयंत्रों पर असर पड़ा है, वहां यूरिया का उत्पादन लगभग 50 प्रतिशत कम हो गया है। संयंत्र अधिकारियों के मुताबिक, वहीं इसके उलट इन जगहों पर ऊर्जा की खपत की खपत 40 प्रतिशत तक बढ़ गई है, क्योंकि कम लोड पर चलने वाली बड़ी अमोनिया-यूरिया ट्रेन की तापीय दक्षता में भारी गिरावट आई है।

एक संयंत्र के परिचालन प्रबंधक ने कहा, ‘इस पैमाने के संयंत्र अपनी मर्जी से उत्पादन बढ़ाने या घटाने के लिए डिजाइन नहीं किए गए हैं।’ 

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First Published - March 22, 2026 | 10:23 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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