facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

वॉयस AI से आएगी असली समानता: नंदन नीलेकणी

Advertisement

भारत में 1.4 अरब लोग हैं जिनमें से करोड़ों लोग अभी भी फीचर फोन का उपयोग करते हैं और 100 से अधिक बोली जाने वाली भाषाएं सक्रिय उपयोग में हैं।

Last Updated- January 29, 2026 | 9:08 AM IST
Infosys Nandan Nilekani

इन्फोसिस के चेयरमैन एवं एकस्टेप फाउंडेशन के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी ने कहा कि दुनिया में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) के लिए चल रही होड़ के बीच वॉयस एआई भारत में वास्तविक डिजिटल समानता लाने वाला एकमात्र व्यावहारिक जरिया होगा।

नीलेकणी ने एनवीडिया में दक्षिण एशिया के प्रबंध निदेशक विशाल धूपड़ के साथ एक चर्चा में कहा,‘अगर कोई व्यक्ति कंप्यूटर से बात कर सकता है और निर्देश या जानकारी वापस पा सकता है या किसी एजेंट को काम करने के लिए कह सकता है तो यह एक ठोस कामयाबी होगी। यह उस देश में और भी अधिक महत्त्वपूर्ण है जहां कई भाषाएं और बोलियां हैं।’

भारत में 1.4 अरब लोग हैं जिनमें से करोड़ों लोग अभी भी फीचर फोन का उपयोग करते हैं और 100 से अधिक बोली जाने वाली भाषाएं सक्रिय उपयोग में हैं। नीलेकणी ने आगे कहा कि वॉयस एआई एकमात्र व्यावहारिक इंटरफेस है और भारत में सच्ची डिजिटल समानता की कुंजी है। उन्होंने कहा,‘जिस तरह यूपीआई ने सभी के लिए डिजिटल भुगतान आसान बना दिया है उसी तरह आवाज से चलने वाले इंटरफेस हर नागरिक के लिए कृषि, शिक्षा एवं अन्य जैसे क्षेत्रों में अवसरों की बाधाओं को दूर कर सकते हैं। साक्षरता अब कोई बाधा नहीं रहेगी।’

नीलेकणी ने किफायती डिजाइन (बनावट) के साथ एक बड़ी आबादी के लिए वॉयस एआई वाले एप्लिकेशन बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने के लिए एआई और किफायती इंजीनियरिंग लागू करने में आगे रहेगा।

उन्होंने कहा,‘इसका वैश्विक स्तर पर उपयोग होगा क्योंकि दुनिया के कई देश इसे वहन नहीं कर सकते हैं। अगर हम 22 भारतीय भाषाओं में बड़ी आबादी के लिए वॉयस एआई तैयार कर सकते हैं तो फिर यह एक वैश्विक जरूरत बन जाएगी। वॉयस एआई अंतिम पड़ाव है। अगर कोई व्यक्ति कंप्यूटर से बात कर सकता है और निर्देश या जानकारी वापस पा सकता है या किसी एजेंट को काम करने के लिए कह सकता है तो यही अंतिम निष्कर्ष होगा। यह उस देश में और भी अधिक महत्त्वपूर्ण है जहां इतनी भाषाएं और बोलियां हैं।’

धूपड़ ने कहा कि वॉयस ऐप का मकसद यह सुनिश्चित करना होगा कि यह निर्बाध, भरोसेमंद और सस्ता हो। धूपड़ ने कहा,‘हम सभी जानते हैं कि एक लेन-देन करने पर क्या लागत आती । लेन-देन पर लागत कम करनी होगी। भारतीयों के लिए लागत कम रखने के लिए हमें वॉयस एआई की तरफ कदम आगे बढ़ाना ही होगा।’

 

Advertisement
First Published - January 29, 2026 | 9:08 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement