रोजमर्रा की खपत की वस्तुएं (एफएमसीजी) बनाने वाली कंपनियों पर वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) के दौरान पश्चिम एशिया संकट का असर सीमित रहने की संभावना है। ब्रोकरेज कंपनियों के अनुसार इसकी वजह यह है कि इस दौरान मांग स्थिर रही। लेकिन उनका अनुमान है कि वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में युद्ध का असर महसूस किया जा सकता है।
विश्लेषकों को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में मार्जिन स्थिर रहेगा। नोमूरा ने एफएमसीजी कंपनियों के संबंध में अपनी तिमाही-पूर्व रिपोर्ट में कहा, ‘हमें उम्मीद है कि थोड़े-से सुधार के साथ चौथी तिमाही की मांग तीसरी तिमाही जैसी ही रहेगी क्योंकि इस तिमाही के दौरान बाजार में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की वजह से कम कीमत वाले उत्पादों का पूरा फायदा मिला।’ रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बिक्री की मात्रा काफी हद तक स्थिर रही है।’
इसमें कहा गया है, ‘हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में उपभोक्ताओं के मुख्य आहार की बिक्री में सालाना आधार पर 9 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी, जो सालाना आधार पर इसकी आठ तिमाहियों की औसत वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत से अधिक है। कम कीमत वाले कच्चे माल के स्टॉक से मार्जिन को सहारा मिलेगा और इससे एबिटा वृद्धि सालाना आधार पर 10.5 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी, जो सालाना आधार पर इसकी आठ तिमाहियों की औसत वृद्धि दर 4.5 प्रतिशत से काफी अधिक है।’
नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने कहा कि उसे उन कंपनियों पर कोई खास असर पड़ने की आशंका नहीं है जिनका पश्चिम एशिया में कारोबार है।
ब्रोकरेज कंपनी ने कहा, ‘मुख्य आहार वाली श्रेणी में सीसीएल प्रोडक्ट्स, बजाज कंज्यूमर और टाटा कंज्यूमर (नरिशको) के बिक्री की मात्रा में वृद्धि के लिहाज से अग्रणी रहने की संभावना है। इनके बाद नेस्ले और बीकाजी फूड्स का स्थान है।’ उसने कहा कि इसके विपरीत इमामी, यूनाइटेड स्पिरिट्स (पॉपुलर), कोलगेट, यूनाइटेड ब्रुअरीज और आईटीसी (सिगरेट) की बिक्री की मात्रा कमजोर रहने की आशंका है।
नोमूरा ने यह भी कहा कि मार्च में बेमौसम बारिश बिक्री पर बुरा असर डाल सकती है, खास तौर पर गर्मियों से जुड़ी श्रेणियों जैसे जूस, कार्बोनेटेड पेय, कूलिंग ऑयल, आइसक्रीम, टैल्कम पाउडर, डियो, फेस वॉश और सनस्क्रीन की बिक्री पर।
लेकिन ब्रोकरेज ने चेतावनी दी है कि वित्त वर्ष 27 पहली तिमाही पर असर पड़ सकता है, क्योंकि भू-राजनीतिक स्थितियों के कारण वाणिज्यिक एलपीजी की कमी हो गई है। इसका असर टाइल्स, कांच, कपड़ों और रेस्तरां जैसे कुछ क्षेत्रों में उत्पादन पर पड़ना या उत्पादन रुकना शुरू हो गया है। इस वजह से दिहाड़ी मजदूर अपने गांव-घर लौटने लगे हैं। इस कदम से उनकी आमदनी कम हो सकती है। नोमूरा का अनुमान है कि इस क्रमिक असर के कारण इस तिमाही में खपत धीमी हो सकती है।