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पश्चिम एशिया संकट के बीच MSME को सहारा देगी सरकार, महंगाई-तेल की बढ़ते कीमतों से बचाव की कोशिश

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पश्चिम एशिया संकट से अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए सरकार ने MSME और निर्यातकों को राहत पैकेज, टैक्स कटौती और नई योजनाओं के जरिए सुरक्षा देने की तैयारी कर रही है

Last Updated- March 29, 2026 | 6:04 PM IST
MSME sector
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

सरकार ने संकेत दिया है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट अगर और लंबा खिंच गया तो अर्थव्यवस्था के कमजोर हिस्सों को और मदद मिल सकती है। खासकर छोटे-मोटे उद्योग यानी MSME सेक्टर पर नजर है। न्यूज एजेंसी PTI के सूत्रों का कहना है कि ऐसा करने से ये कारोबारी टिक सकेंगे और घरेलू बाजार में महंगाई भी काबू में रहेगी।

सरकार पहले ही पेट्रोल-डीजल पर टैक्स घटाने और निर्यातकों की दिक्कतें कम करने जैसे कदम उठा चुकी है और जरूरत पड़ी तो सबसे ज्यादा प्रभावित सेक्टरों को बचाने के लिए और फैसले भी ले सकती है।

तेल की बढ़ती कीमतों से बचाव के लिए कड़े कदम

सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर सिर्फ तीन रुपये प्रति लीटर कर दी है। डीजल को इस ड्यूटी से पूरी तरह छूट दे दी गई है। ये फैसला इसलिए लिया गया ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का बोझ आम लोगों पर न पड़े।

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर सैन्य हमले शुरू किए थे। ईरान ने भी पलटवार किया। उसके बाद से कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50 फीसदी की तेजी आई। इस महीने की शुरुआत में ये 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, हालांकि अब ये करीब 100 डॉलर के आसपास आ गई हैं।

Also Read: वेस्ट एशिया युद्ध के बीच PM Modi की चेतावनी, अफवाहों से बचें, देश के सामने बड़ा ईंधन संकट खड़ा

भारत अपनी 88 फीसदी कच्ची तेल की जरूरत और लगभग आधी प्राकृतिक गैस विदेश से मंगवाता है। ज्यादातर ये सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आती है। ऐसे में वहां का तनाव देश के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है।

सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF के निर्यात पर फिर से ड्यूटी लगा दी है। इससे देश के अंदर इन ईंधनों की उपलब्धता बनी रहेगी।

निर्यातकों और MSME के लिए खास पैकेज

संकट की वजह से निर्यातकों को माल भेजने में काफी दिक्कतें आ रही हैं। इसलिए सरकार ने इस महीने उनके निर्यात दायित्वों को पूरा करने में कुछ रियायतें दे दी हैं।

इसके साथ ही सरकार ने रिलीफ स्कीम शुरू की है, जिसका पूरा नाम है रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन। इस पर करीब 497 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस स्कीम का मकसद है कि जो शिपिंग (freight) के खर्च अचानक बहुत बढ़ गए हैं, इंश्योरेंस महंगा हो गया है और युद्ध की वजह से जो जोखिम बढ़े हैं, उनसे निर्यातकों को राहत मिले।

आसान शब्दों में कहें तो इससे सप्लाई चेन पटरी पर बनी रहेगी, छोटे निर्यातकों (MSME) को सहारा मिलेगा, ऑर्डर कैंसिल होने से बचेंगे और एक्सपोर्ट सेक्टर में नौकरियां भी सुरक्षित रहेंगी।

सोमवार को सरकार ने रोडीटीईपी स्कीम के पूरे फायदे फिर से बहाल कर दिए। पिछले महीने इसकी दरें आधी कर दी गई थीं, जिस पर निर्यातक समुदाय ने नाराजगी जताई थी। अब डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड के नोटिफिकेशन के मुताबिक 22 फरवरी 2026 वाली दरें और वैल्यू कैप 23 फरवरी से 31 मार्च 2026 तक सभी योग्य निर्यात उत्पादों पर लागू होंगी।

होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण जहाजों को अपना रूट बदलना पड़ रहा है। सफर लंबा हो गया है, ट्रांसशिपमेंट हब्स पर भीड़ बढ़ गई है और युद्ध से जुड़े अतिरिक्त चार्ज लग रहे हैं। इससे लॉजिस्टिक्स की लागत काफी ऊंची हो गई है और निर्यात के लिए अनिश्चितता का माहौल बन गया है।

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी आनंदा नागेश्वरन ने शनिवार को जारी अपनी नए मासिक इकोनॉमिक रिव्यू में कहा है कि तुरंत सबसे ज्यादा प्रभावित कारोबारियों और घरेलू परिवारों को राहत देनी होगी। साथ ही इस संघर्ष ने जिन लंबी अवधि की जरूरतों को उजागर किया है, जैसे विभिन्न वस्तुओं और सामग्रियों में लंबे समय के बफर स्टॉक बनाना, उनके लिए वित्तीय जगह भी बनानी होगी। इसके लिए खर्च की प्राथमिकताओं को फिर से तय करना और सिर्फ लक्षित राहत देना जरूरी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के झटके इनपुट लागत बढ़ने, सप्लाई में बाधा और कई सेक्टरों पर दबाव के जरिए फैल रहे हैं। शुरुआती संकेतों से पता चल रहा है कि आर्थिक गतिविधि में थोड़ी मंदी आ रही है।

निकट भविष्य का माहौल अनिश्चित बना हुआ है। पश्चिम एशिया संकट इनपुट लागत बढ़ाने और सप्लाई बाधित होने से ग्रोथ के लिए नकारात्मक जोखिम पैदा कर रहा है। हालांकि मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक बुनियादी ढांचा और घरेलू मांग का मजबूत रुख इस असर को कुछ हद तक कम कर सकता है।

(PTI के इनपुट के साथ)

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First Published - March 29, 2026 | 5:53 PM IST

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