facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

Zomato-Swiggy की फीस बढ़ी, FMCG महंगा… कंज्यूमर सेक्टर में क्या हो रहा है?

Advertisement

महंगाई और बढ़ती लागत के बीच कंपनियां बदल रहीं रणनीति, छोटे पैक से लेकर कीमत बढ़ाने तक कई बड़े संकेत

Last Updated- March 30, 2026 | 3:43 PM IST
FMCG Stocks

Zomato-Swiggy Platform Fee Hike: कंज्यूमर सेक्टर में जहां कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नई-नई रणनीतियां अपना रही हैं, वहीं महंगाई और बढ़ती लागत उनके सामने बड़ी चुनौती बनती जा रही है। सेंट्रम ब्रोकरेज की ताजा रिपोर्ट इस बदलती तस्वीर के कई अहम पहलुओं को सामने लाती है।

छोटे पैक का बड़ा खेल, कंपनियां बदल रहीं रणनीति

अब महंगे बड़े पैक का दौर धीरे-धीरे बदलता नजर आ रहा है। खासकर प्रोटीन और हेल्थ प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियां छोटे पैक लॉन्च कर रही हैं। वजह साफ है, कीमत कम रखकर ज्यादा से ज्यादा नए ग्राहकों को जोड़ना। पहले ये प्रोडक्ट सिर्फ फिटनेस से जुड़े लोगों तक सीमित थे, लेकिन अब कंपनियां आम ग्राहकों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही हैं।

इंस्टेंट हाउस हेल्प में निवेश की बारिश, लेकिन मुनाफे पर सवाल

घर पर तुरंत काम करने वाली सेवाओं का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। निवेशक इस सेक्टर में पैसा लगाने को तैयार हैं और कंपनियों की वैल्यूएशन तेजी से बढ़ रही है। लेकिन इस चमक के पीछे एक सच्चाई भी छिपी है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन कंपनियों का असली मुनाफा अभी पूरी तरह साबित नहीं हुआ है। यानी आगे चलकर यह सेक्टर चुनौती का सामना कर सकता है।

कंज्यूमर सेक्टर में तेजी भी, दबाव भी

रिपोर्ट बताती है कि भारत में पुरुषों के ज्वेलरी बाजार में जबरदस्त उछाल आया है और 2025 में इसमें 25 से 30 प्रतिशत की ग्रोथ देखी गई है। लेकिन दूसरी तरफ खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ने की आशंका है। होटल अब महंगे ईंधन का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे बिरयानी जैसी आम डिश भी महंगी हो सकती है।

शराब सेक्टर भी दबाव में है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण लागत बढ़ रही है और सप्लाई पर असर पड़ रहा है। कंपनियां अब कीमत बढ़ाने की मांग कर रही हैं। वहीं FMCG कंपनियां भी लागत के दबाव से जूझ रही हैं। कुछ कंपनियां कीमत बढ़ाने की तैयारी में हैं, तो कुछ प्रोडक्ट की मात्रा कम कर रही हैं।

रिटेल की रफ्तार धीमी, कंपनियों की नई चालें

फरवरी में रिटेल ग्रोथ घटकर 9 प्रतिशत पर आ गई है, जो इस सेक्टर में धीमापन दिखाती है। कंपनियां अब मुनाफा बचाने के लिए ट्रेड मार्जिन कम कर रही हैं। वहीं गर्मी के मौसम में जिन कंपनियों को ज्यादा बिक्री की उम्मीद थी, जैसे कोल्ड ड्रिंक और एसी बनाने वाली कंपनियां, उनके सामने मौसम भी चुनौती बन सकता है।

फूड और डिलीवरी सेक्टर में भी बदलाव

सरकार ने साफ कहा है कि रेस्टोरेंट्स ईंधन की बढ़ी कीमतों का बोझ सीधे ग्राहकों पर न डालें। दूसरी तरफ बीयर बनाने वाली कंपनियों ने कच्चे माल की कमी की चेतावनी दी है। ऑनलाइन फूड डिलीवरी में भी मुकाबला तेज हो गया है। जोमैटो और स्विगी दोनों ने प्लेटफॉर्म फीस बढ़ा दी है, जिससे ग्राहकों का खर्च बढ़ सकता है।

कंपनियां विस्तार में जुटीं, नए दांव खेले जा रहे

इस बीच कई कंपनियां अपने कारोबार को तेजी से बढ़ा रही हैं। बाटा 700 से ज्यादा फ्रेंचाइजी स्टोर तक पहुंच गया है। मैक्स फैशन अगले साल 40 से 50 नए स्टोर खोलने की योजना बना रहा है। नायका नए इंटरनेशनल ब्रांड ला रही है, तो लिशियस जैसे ब्रांड नए प्रोडक्ट्स लॉन्च कर रहे हैं।

महंगाई और रोजगार का क्या हाल

रिपोर्ट के अनुसार फरवरी में महंगाई दर बढ़कर 3.21 प्रतिशत हो गई है, जबकि बेरोजगारी दर थोड़ी घटकर 4.9 प्रतिशत पर आ गई है। वहीं फसल की बुवाई पिछले साल के मुकाबले कम रही है, जिससे आगे चलकर कीमतों पर असर पड़ सकता है।

तस्वीर साफ है, लेकिन आसान नहीं

सेंट्रम की रिपोर्ट एक बात साफ करती है कि कंज्यूमर सेक्टर में मौके भी हैं और जोखिम भी। कंपनियां ग्राहकों को जोड़ने के लिए नए तरीके अपना रही हैं, लेकिन महंगाई और बढ़ती लागत का दबाव अभी बना हुआ है। आने वाले समय में यही तय करेगा कि कौन सी कंपनी आगे निकलती है और कौन पीछे रह जाती है।

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)

Advertisement
First Published - March 30, 2026 | 3:43 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement