जेएसडब्ल्यू स्टील ने आज ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले के ढिंकिया में अपने प्रस्तावित विशाल एकीकृत इस्पात परिसर का निर्माण शुरू कर दिया। इस पर 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का अनुमान है। यह देश के इस्पात क्षेत्र में अब तक हुए सबसे बड़े औद्योगिक निवेशों में से एक है।
यह परियोजना उसी भू-खंड पर विकसित की जा रही है, जिसे करीब दो दशक पहले दक्षिण कोरिया की इस्पात दिग्गज पोस्को के लिए तय किया गया था। तब 12 अरब डॉलर के निवेश वाले पोस्को के प्रस्तावित इस्पात संयंत्र की सालाना क्षमता 1.2 करोड़ टन थी। लेकिन जमीन अधिग्रहण से जुड़े लंबे विवादों और पर्यावरण की चिंताओं की वजह से यह संयंत्र शुरू नहीं हो पाया था।
जेएसडब्ल्यू ग्रुप के चेयरमैन सज्जन जिंदल ने कहा कि देश में ऐसा पहली बार हो रहा है कि 1.32 करोड़ टन प्रति वर्ष उत्पादन क्षमता का इस्पात उत्पादन का इतना विशाल संयंत्र 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश के साथ बनाया जा रहा है। उन्होंने ऐलान किया कि इस संयंत्र की क्षमता बढ़ाकर अंतत: 2.5 करोड़ टन प्रति वर्ष तक की जाएगी। इससे यह दुनिया के सबसे बड़े इस्पात परिसरों में शामिल हो जाएगा।
भारत का इरादा साल 2030 तक 30 करोड़ टन प्रति वर्ष इस्पात उत्पादन क्षमता हासिल करना है। जिंदल ने कहा कि ओडिशा राष्ट्रीय उत्पादन में लगभग आधी हिस्सेदारी के लिए तैयार है। यह देश का इस्पात विनिर्माण हब बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि अकेले जेएसडब्ल्यू समूह ही राज्य में चार जगहों पर लगभग 5 करोड़ टन प्रति वर्ष की कुल क्षमता वाली इस्पात विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने की योजना बना रहा है।
कंपनी का सबसे बड़ा इस्पात परिसर पारादीप के पास बन रहा है। एक अन्य बड़ी इकाई क्योंझर जिले में बनाने की योजना है। इसके लिए जमीन अधिग्रहण का काम चल रहा है। इसके अलावा जेएसडब्ल्यू स्टील ने ढेंकानल और संबलपुर जिलों में एकीकृत इस्पात परिसर विकसित करने के लिए पोक्सो और जापान की जेएफई स्टील के साथ अलग-अलग संयुक्त उद्यम बनाए हैं।
जिंदल ने इस निवेश के स्तर को अभूतपूर्व बताया। उन्होंने कहा कि ऐसा दुनिया में पहली बार होगा, जब कोई एक ही कंपनी किसी एक राज्य में 5 करोड़ टन प्रति वर्ष की कुल क्षमता वाली इस्पात विनिर्माण इकाइयां लगा रही है। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं वैश्विक स्तर पर इस्पात की महाशक्ति बनने के देश के लक्ष्य को काफी मजबूती देंगी। साथ ही ओडिशा में औद्योगिक विकास और रोजगार पैदा करने की रफ्तार भी तेज करेंगी।
पारादीप के पास इस एकीकृत परियोजना में 1.32 करोड़ टन प्रति वर्ष क्षमता वाला एकीकृत इस्पात संयंत्र, 1 करोड़ टन प्रति वर्ष क्षमता का सीमेंट संयंत्र, 3.2 करोड़ टन प्रति वर्ष क्षमता का पेलेट संयंत्र, 900 मेगावॉट क्षमता वाली बड़ी बिजली उत्पादन इकाई और निजी इस्तेमाल वाली जेट्टी भी शामिल है। जहां पहले चरण का पेलेट संयंत्र पूरा होने के करीब है, वहीं ब्लास्ट फर्नेस और उससे जुड़ी अन्य इकाइयों पर काम शुरू होने वाला है। इनमें कोक ओवन और सिंटर संयंत्र का बुनियादी ढांचा शामिल है।
कंपनी और राज्य सरकार के अनुमानों के अनुसार 2,958 एकड़ क्षेत्र में 1.25 लाख करोड़ रुपये के कुल निवेश के साथ आने वाली 1.32 करोड़ टन प्रति वर्ष क्षमता की इस परियोजना से क्षेत्र में लगभग 42,000 लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। इस्पात संयंत्र के विस्तार के अगले चरण में 1.18 करोड़ टन प्रति वर्ष की अतिरिक्त क्षमता जोड़ी जाएगी। इससे ओडिशा इकाई में इस्पात की कुल निर्माण क्षमता 2.5 करोड़ टन प्रति वर्ष हो जाएगी।