facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

जेएसडब्ल्यू स्टील घरेलू बाजार पर देगी प्राथमिकता, यूरोप के लिए तैयार कर रही ग्रीन स्टील

Advertisement

महाराष्ट्र के सालाव में जेएसडब्ल्यू स्टील 40 लाख टन का ग्रीन स्टील संयंत्र लगा रही है, जो प्राकृतिक गैस और अक्षय ऊर्जा पर आधारित डीआरआई पर आधारित होगा।

Last Updated- October 29, 2025 | 10:13 PM IST
JSW Steel

इस्पात उद्योग यूरोपीय संघ (ईयू) के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) के हिसाब से तैयारी में जुटा हुआ है। इसके मद्देनजर जेएसडब्ल्यू स्टील कम-कार्बन वाले भविष्य की दिशा में बढ़ रही है। साथ ही कंपनी घरेलू बाजार को भी लगातार प्राथमिकता दे रही है।

जेएसडब्ल्यू स्टील के संयुक्त प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्य अधिकारी जयंत आचार्य ने कहा, ‘हमारा मुख्य जोर घरेलू बाजार पर होगा क्योंकि हम आने वाले वर्षों में भारत में वाकई दमदार वृद्धि देख रहे हैं।’ कंपनी कम-कार्बन वाले निर्यात के लिए जरूरी कदम उठा रही है, क्योंकि इस्पात निर्यात का भारत का मुख्य बाजार यूरोप सीबीएएम व्यवस्था अपनाने जा रहा है।

महाराष्ट्र के सालाव में जेएसडब्ल्यू स्टील 40 लाख टन का ग्रीन स्टील (पर्यावरण के अनुकूल) संयंत्र लगा रही है, जो प्राकृतिक गैस और अक्षय ऊर्जा पर आधारित डीआरआई (डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन) पर आधारित होगा। इसे अलग-अलग चरणों में बनाया जा सकता है।

आचार्य ने कहा, ‘अब से लेकर वित्त वर्ष 31 के आखिर तक हम सालाव परियोजना पूरी करेंगे, जो दो चरणों में 40 लाख टन तक की होगी। 20 लाख टन का पहला चरण हमारे पांच करोड़ टन क्षमता के निर्धारित लक्ष्य का हिस्सा है।’

अलबत्ता उन्होंने कहा कि कंपनी अपनी क्षमता विस्तार योजनाओं और उनके समय को अंतिम रूप देने से पहले सीबीएएम की रूपरेखा और टैरिफ संरचनाओं पर और स्पष्टता का इंतजार कर रही है। दिशा-निर्देश नवंबर में आने की उम्मीद है।

सीबीएएम को 1 जनवरी से लागू किया जाना है। इसका उद्देश्य ईयू के उत्पादकों, जो अपने कार्बन उत्सर्जन के लिए भुगतान करते हैं तथा विदेशी निर्यातकों, जो ऐसा नहीं करते हैं, के बीच बराबरी का माहौल बनाना है। इसके लिए ईयू में आने वाले आयात पर ‘कार्बन लागत’ की व्यवस्था की जा रही है। आचार्य ने कहा कि सालाव की यह क्षमता कम कार्बन उत्सर्जन वाले इस्पात उत्पादों के उत्पादन के मामले में जेएसडब्ल्यू स्टील की इकाई के रूप में काम करेगी। उन्होंने ‘यह क्षमता मध्य अवधि में ऐसे उत्पादों के लिए हमारी निर्यात जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी होगी।’

Advertisement
First Published - October 29, 2025 | 10:03 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement