देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआईएल) ने कहा है कि कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) भारत को वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकती है। इसी वजह से कंपनी 9 सीबीजी प्लांट लगाने के लिए रणनीतिक निवेश कर रही है। कंपनी के प्रबंध निदेशक और सीईओ हिसाशी ताकेउची ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
सीबीजी एक ऐसा ईंधन है जिसे सीएनजी वाहनों में बिना किसी बदलाव के इस्तेमाल किया जा सकता है। यह कृषि और जैविक कचरे से तैयार की जाती है और शुद्धिकरण के बाद इसके गुण सीएनजी जैसे ही हो जाते हैं।
हाल ही में पश्चिम एशिया में तनाव के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद मारुति की सीएनजी कारों की बुकिंग में करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कंपनी ने मई महीने में रिकॉर्ड 78,000 सीएनजी वाहन बेचे।
ताकेउची ने दिल्ली में देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल वैगनआर लॉन्च करते हुए कहा कि भारत में ग्राहकों की अलग-अलग जरूरतों और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए कंपनी मल्टी-पाथवे रणनीति पर काम कर रही है। इसमें इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), मजबूत हाइब्रिड तकनीक और सीएनजी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि यदि सीएनजी में इस्तेमाल होने वाली गैस बायोमास से बनाई जाए तो यह कार्बन-नेगेटिव ईंधन बन सकती है। इसी कारण कंपनी ने सीबीजी को नेट-ज़ीरो लक्ष्य के लिए एक मजबूत विकल्प माना है।
ताकेउची ने बताया कि कंपनी ने 9 सीबीजी प्लांट लगाने की घोषणा की है, जिनमें से 2 प्लांट पहले ही चालू हो चुके हैं।
भारत में सीबीजी को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने वर्ष 2018 में सतत वैकल्पिक परिवहन के लिए किफायती समाधान (सैटैट) योजना शुरू की थी। इसके तहत निजी कंपनियां, उद्यमी और सहकारी संस्थाएं सीबीजी प्लांट लगा सकती हैं।
हालांकि, सीबीजी उद्योग के सामने अभी कई चुनौतियां हैं। अगस्त 2025 में पीएनजीआरबी के लिए तैयार डेलॉइट की एक रिपोर्ट के अनुसार, गैस पाइपलाइन नेटवर्क की कमी, फीडस्टॉक की उपलब्धता, परिवहन लागत और नियामकीय देरी इस क्षेत्र के विस्तार में बड़ी बाधाएं हैं।
देश में 8,000 से अधिक सीएनजी स्टेशन और 307 से ज्यादा शहर गैस वितरण क्षेत्र मौजूद हैं, जहां सीबीजी की आपूर्ति की जा सकती है। लेकिन कई सीबीजी प्लांट गैस पाइपलाइन से जुड़े नहीं हैं, जिसके कारण गैस को सड़क मार्ग से सिलेंडरों में ढोना पड़ता है। इससे लागत बढ़ जाती है और बड़े स्तर पर आपूर्ति मुश्किल हो जाती है।
डेलॉयट रिपोर्ट में कहा गया है कि सीबीजी प्लांट, गैस नेटवर्क और सीएनजी स्टेशनों के बीच पाइपलाइन कनेक्टिविटी बढ़ाने से परिवहन लागत घटेगी और देश में सीबीजी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ सकेगा।