पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच बढ़ती अनिश्चितताओं और लागत दबाव को देखते हुए मारुति सुजुकी इंडिया (MSIL) ने मितव्ययिता (austerity) उपाय लागू करने की घोषणा की है। कंपनी ने कर्मचारियों के लिए वर्क-फ्रॉम-होम व्यवस्था, विदेशी और घरेलू यात्राओं पर नियंत्रण, कारपूलिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के साथ-साथ दफ्तरों और घरों में ऊर्जा बचत से जुड़े कदम उठाने का फैसला किया है।
कंपनी की एनुअल रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक MSIL में 19,966 नियमित कर्मचारी और 33,811 गैर-नियमित कर्मचारी काम कर रहे थे। मंगलवार को सोशल मीडिया पर जारी बयान में कंपनी ने कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री की मितव्ययिता अपनाने की अपील और पश्चिम एशिया युद्ध के संभावित लंबी अवधि के प्रभावों को ध्यान में रखते हुए उठाए गए हैं।
ऑटो कंपनी ने कहा कि मैनेजमेंट संकट के समय और सामान्य कारोबारी परिस्थितियों दोनों में कारोबार को “सबसे ज्यादा उत्पादक और दक्ष तरीके” से संचालित करेगा, ताकि पेट्रोलियम उत्पादों के उपयोग और विदेशी मुद्रा खर्च को न्यूनतम रखा जा सके।
कंपनी ने इसे “सभी प्रक्रियाओं की दोबारा समीक्षा और पुनर्मूल्यांकन करने का सही समय” बताते हुए कहा कि वह राष्ट्रीय उद्देश्यों और अपने कारोबार की मजबूती दोनों को ध्यान में रखते हुए सभी व्यावसायिक परिचालनों में दक्षता बढ़ाने के प्रयास करेगी।
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इन उपायों के तहत कंपनी ने कहा कि जहां परिचालन के लिहाज से संभव होगा, वहां कर्मचारियों के लिए वर्क-फ्रॉम-होम व्यवस्था लागू की गई है, ताकि आने-जाने में होने वाली ईंधन खपत को कम किया जा सके। कंपनी ने कहा कि यह कदम उसकी मौजूदा रिमोट वर्किंग नीति के अनुरूप है।
कंपनी ने यात्रा नियमों को भी सख्त करने का फैसला किया है। बयान में कहा गया, “विदेश यात्राओं से तब तक बचा जाएगा, जब तक वे कारोबारी जरूरतों के लिए बेहद जरूरी न हों।” साथ ही, अब वर्चुअल मीटिंग्स को प्राथमिकता दी जाएगी और घरेलू यात्राओं को भी न्यूनतम रखने की कोशिश की जाएगी।
इसके अलावा, MSIL ने कर्मचारियों और बिजनेस पार्टनर्स से कारपूलिंग और जहां संभव हो वहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल जैसी टिकाऊ यात्रा आदतों को अपनाने की अपील की है।
एनर्जी बचाने पर जोर
कंपनी ने दफ्तरों और घरों में ऊर्जा बचत पर भी जोर दिया है। कर्मचारियों से एयर कंडीशनर, पंखों और लाइटिंग सिस्टम के इस्तेमाल को जरूरत के मुताबिक सीमित और अधिक दक्ष तरीके से करने की अपील की गई है।
MSIL का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों और भारत के आयात बिल को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इसके चलते कंपनियां अपने परिचालन खर्च और ऊर्जा उपयोग की दोबारा समीक्षा कर रही हैं।