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ब्रिटेन कारोबार के लिए एक-दो साल में लेंगे निर्णय: MD & CEO, टाटा स्टील

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Last Updated- May 03, 2023 | 9:55 PM IST
Tata Steel MD & CEO T V Narendran
Business Standard

यूरोप में संभावित आर्थिक मंदी के के मद्देनजर टाटा स्टील द्वारा अपने वित्तीय नतीजों की घोषणा के दौरान ब्रिटेन इकाई के लिए संभावित जोखिमों को उजागर किए जाने के एक दिन बाद टाटा स्टील के एमडी एवं सीईओ टीवी नरेंद्रन ने ई​शिता आयान दत्त से बातचीत में कहा कि ब्रिटेन सरकार का प्रस्ताव हरित इस्पात में बदलाव के लिए आवश्यक निवेश के लिहाज से पर्याप्त नहीं है। मुख्य अंश:

यूरोपीय कारोबार के लिए दबाव की जांच किन वजहों से प्रेरित है?

सामान्य तौर पर यह ऑडिटरों के काम का हिस्सा है। यह ब्रिटेन के कारोबार के लिए कहीं अधिक है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान देखी गई अस्थिरता से पता चलता है कि कुछ परिसंपत्तियां खत्म होने जा रही हैं। अब यह जगजाहिर है कि ब्रिटेन का कारोबार ढांचागत तौर पर बेहतर ​स्थिति में नहीं है। ऐसे में हरित इस्पात को अपनाने के लिए सरकारी मदद की आवश्यकता है क्योंकि उसके पास पर्याप्त नकदी प्रवाह नहीं है। नीदरलैंड का कारोबार अपने दम पर खड़ा है। उसके पास पर्याप्त नकदी उपलब्ध है और एबिटा हमेशा सकारात्मक रहा है। इसलिए उसे भारत से किसी मदद की जरूरत नहीं है।

सरकार से इस मुद्दे पर करीब तीन साल से बातचीत की क्या प्रगति है?

हां, करीब तीन साल हो चुके हैं, लेकिन इस दौरान तीन से चार सरकारें रही हैं। करीब तीन महीने पहले हमारे पास सरकार की ओर से एक औपचारिक प्रस्ताव आया है।

क्या आपने प्रस्ताव के बारे में सरकार को अपना जवाब दे दिया है?

हमने जवाब दे दिया है लेकिन ब्रिटेन सरकार वि​भिन्न कंपनियों और मुद्दों पर भी टाटा समूह से बात कर रही है। यह एक समूह स्तर की बातचीत है जहां टाटा स्टील अपनी परिसंप​त्तियों और मौजूदगी के कारण एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। मैं समझता हूं कि हमने यह स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा प्रस्ताव हरित इस्पात को अपनाने के लिए आवश्यक निवेश के लिहाज से उचित नहीं है।

ब्रिटेन और नीदरलैंड में इस बदलाव की लागत क्या होगी?

मैं कोई सटीक आंकड़ा नहीं देना चाहता लेकिन आमतौर पर पूंजीगत खर्च के करीब 50 फीसदी की मांग की जाती है। इसके अलावा अन्य खर्चों के लिए भी मदद मांगी जाती है। यह इस्पात कंपनियों द्वारा अन्य सरकारों से की गई मांग से अलग नहीं है। नीदरलैंड में हमारे कारोबार के नकदी प्रवाह से अ​धिकांश खर्च को पूरा किया जा सकता है लेकिन सरकार से भी कुछ मदद की दरकार होगी। मगर, वह ब्रिटेन की तरह नहीं होगी क्योंकि वहां मदद न मिलने पर बदलाव संभव नहीं होगा। हमें सभी के लिए समान अवसर उपलब्ध कराए जाने के लिहाज से भी मदद की दरकार है। यदि हमारे प्रतिस्प​र्धियों को 50 फीसदी अनुदान मिलता है और हमें कुछ नहीं मिलता तो यह उचित नहीं होगा।

Also read: अगर EU लगाता है जवाबी शुल्क तो मुंहतोड़ जवाब देगा भारत

ब्रिटेन में निवेश को बरकरार रखने अथवा उसे समेटने के बारे में कब तक अंतिम निर्णय लेंगे?

हम अप​स्ट्रीम परिसंप​त्तियों (Port Talbot) के लिए अगले 12 से 24 महीनों में नि​श्चित तौर पर निर्णय ले लेंगे। ये ऐसी परिसंप​त्तियां हैं ​जिनका जीवन खत्म हो रहा है। इन परिसंप​त्तियों में कोक ओवन संयंत्र, सिनिस्टर संयंत्र और एक ब्लास्ट फर्नेस शामिल हैं जो अपना अ​स्तित्व बचाने के लिए जूझ रहे हैं। डाउनस्ट्रीम परिसंप​​त्तियां अपने दम पर खड़ी हो सकती हैं।

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First Published - May 3, 2023 | 9:55 PM IST

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