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दुबई-लंदन को टक्कर! नवी मुंबई एयरपोर्ट को हब बनाने की तैयारी तेज

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नवी मुंबई एयरपोर्ट को इंटरनेशनल हब बनाने के लिए सरकार के साथ बातचीत तेज, जिससे भारत का ट्रांजिट ट्रैफिक देश में ही रुक सकता है।

Last Updated- April 29, 2026 | 10:04 AM IST
Navi Mumbai airport
Navi Mumbai International Airport (File Photo)

अदाणी द्वारा संचालित नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (एनएमआईएएल) अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा के लिए इसे ‘हब और स्पोक’ डेस्टिनेशन के तौर पर चलाने के लिए सरकार के साथ बातचीत कर रहा है।  मामले से अवगत लोगों के मुताबिक बातचीत काफी आगे बढ़ गई है।

इस कदम से एनएमआईएएल को नागरिक विमानन मंत्रालय के साथ तय किए गए अपने विकास लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलने की उम्मीद है।  एनएमआईएएल का लक्ष्य वर्ष 2026-27 , जो उसके संचालन का पहला पूरा साल होगा, में 1.1 करोड़ यात्रियों को सेवा मुहैया कराना है।  उसका इरादा इसे वित्त वर्ष 2028 तक बढ़ाकर 2 करोड़ तक पहुंचाना है, जो दुनिया के किसी भी हवाई अड्डे के लिए सबसे तेज बढ़ोतरी दर में से एक है।  इस तरह से यह हवाई अड्डा पहले ही चरण में अपनी पूरी क्षमता का उपयोग कर लेना चाहता है। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो यह हब इस सर्दियों तक चालू हो सकता है।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने दिल्ली को देश के पहले हब एयरपोर्ट के तौर पर पहले ही मंजूरी दे दी है, जिसके 1 जून से शुरू होने की उम्मीद है। यह राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य 2030 तक देश को भारतीय यात्रियों के लिए और 2047 तक पूरी दुनिया के लिए पसंदीदा एविएशन हब बनाना है। बेंगलूरु और यहां तक कि राजकोट जैसे कुछ अन्य हवाई अड्डों को भी हब बनाने पर विचार किया जा रहा है।

योजना का मकसद उस ‘ट्रांसफर ट्रैफिक’ को वापस लाना है, जो अब तक दुबई, दोहा, लंदन, फ्रैंकफर्ट जैसे वैश्विक केंद्रों का इस्तेमाल करता रहा है। इसके बजाय वे देश के ही हवाई अड्डों का इस्तेमाल करेंगे। सरकार के कराए एक अध्ययन से पता चला है कि इस पूरी कवायद का उद्देश्य उस मौजूदा रुझान को बदलना है, जिसके तहत भारत से जाने वाले 35 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय यात्री दुबई, लंदन और सिंगापुर जैसे विदेशी शहरों से होकर गुजरते हैं।

‘हब ऐंड स्पोक’ मॉडल देश में छोटे शहरों से यात्रियों को हब एयरपोर्ट तक पहुंचने और वहां से आसानी से अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों से जुड़ने में सक्षम बनाता है। इसके लिए उन्हें अपना सामान दोबारा लेने, उसे फिर से चेक-इन करने या कस्टम्स से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ती। जब वे देश वापस आते हैं, तो यह प्रक्रिया उलट जाती है।

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First Published - April 29, 2026 | 10:04 AM IST

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