facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

NCLAT का बड़ा फैसला! Byju’s की अपील खारिज, Aakash की हिस्सेदारी पर फिलहाल नहीं मिलेगी राहत

Advertisement

Byju's- Aakash Dispute: यह विवाद AESL में इक्विटी फंडिंग को लेकर है, जिसमें बायजूस की पैरेंट कंपनी TLPL की 25% हिस्सेदारी है।

Last Updated- June 08, 2025 | 4:20 PM IST
Byjus
Representative Image

नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड (Byju’s की पैरेंट कंपनी) के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (RP) की याचिका खारिज कर दी है। यह याचिका नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के उस आदेश को चुनौती देने के लिए दायर की गई थी, जिसमें आकाश एजुकेशनल सर्विसेज लिमिटेड (AESL) में शेयरहोल्डिंग की यथास्थिति बनाए रखने को कहा गया था।

NCLAT की दो सदस्यीय बेंच, जिसमें जस्टिस शरद कुमार शर्मा और तकनीकी सदस्य जतिंद्रनाथ स्वैन शामिल थे, ने कहा कि NCLT का आदेश ‘इंटरलॉक्यूटरी’ यानी अंतरिम प्रकृति का है और इसमें किसी पक्ष के अधिकारों पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। साथ ही यह भी कहा गया कि यह आदेश सहमति से पारित हुआ है, इसलिए इसमें दखल देने की जरूरत नहीं है।

आकाश में शेयर को लेकर विवाद क्यों?

यह विवाद AESL में इक्विटी फंडिंग को लेकर है, जिसमें बायजूस की पैरेंट कंपनी TLPL की 25% हिस्सेदारी है। TLPL के RP ने NCLAT में यह कहते हुए अपील की थी कि 27 मार्च को NCLT चेन्नई बेंच ने AESL में शेयरहोल्डिंग की यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था, लेकिन उसके बावजूद उनकी हिस्सेदारी को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

AESL ने इस आदेश को कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जहां कोर्ट ने 8 अप्रैल को NCLT का आदेश रद्द कर केस को फिर से सुनवाई के लिए भेजा। इसके बाद 30 अप्रैल को NCLT में हुई सुनवाई के दौरान TLPL के वकील अभिनव वशिष्ठ ने कहा कि कंपनी की हिस्सेदारी को कम किया जा रहा है, AESL की संपत्तियों को गिरवी रखा जा रहा है और कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में बदलाव कर TLPL के हितों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

गर्मी की छुट्टियों और मामले की जटिलता को देखते हुए NCLT ने शेयरहोल्डिंग में कोई बदलाव न करने का अंतरिम सहमति आदेश जारी किया। TLPL के RP ने इसी आदेश को NCLAT में चुनौती दी, लेकिन ट्रिब्यूनल ने कहा कि यह कोई अंतिम फैसला नहीं है और इसमें किसी के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं हुआ है। इसलिए अपील को खारिज कर दिया गया।

Byju’s की कानूनी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं

यह फैसला Byju’s के खिलाफ चल रहे कई कानूनी मामलों में से एक है। सुप्रीम कोर्ट ने भी बायजूस से जुड़े मामलों पर सुनवाई के दौरान NCLT की कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगाई है और सभी पक्षों को दो हफ्ते तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।

इसके अलावा, अप्रैल में NCLAT ने BCCI और Byju’s के निवेशक ऋजू रवींद्रन के बीच हुए एक सेटलमेंट एग्रीमेंट को भी रद्द कर दिया था, जिससे यह संकेत मिला कि कंपनी के कॉरपोरेट गवर्नेंस पर गहराई से नजर रखी जा रही है।

Advertisement
First Published - June 8, 2025 | 4:20 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement