पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा बाजार में आई उथल-पुथल के कारण वित्त वर्ष 2026 की जनवरी-मार्च तिमाही में कंपनियों की कमाई पर दबाव पड़ने की आशंका है। विभिन्न ब्रोकरेज अनुमानों के अनुसार निफ्टी 50 कंपनियों का कुल शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में महज 4.2 फीसदी बढ़ सकता है जो वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के 10 फीसदी और वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही के 7.6 फीसदी की वृद्धि से काफी कम है। यदि ब्रोकरेज अनुमान सही साबित होते हैं तो यह निफ्टी कंपनियों के लिए सात तिमाही में सबसे धीमी मुनाफा वृद्धि होगी।
ब्रोकरेज अनुमान के अनुसार इंडिगो की प्रवर्तक कंपनी इंटरग्लोब एविएशन, डॉ. रेड्डीज लैब, सिप्ला, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, कोल इंडिया, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस, विप्रो और एनटीपीसी जैसी कंपनियां के कमजोर प्रदर्शन से कुल मुनाफे में नरमी आने का अनुमान है। इसके विपरीत ब्रोकरेज को जोमैटो की प्रवर्तक कंपनी इटर्नल, टाटा स्टील, टाइटन कंपनी, जेएसडब्ल्यू स्टील, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा और टेक महिंद्रा जैसी कंपनियों के मुनाफे में दो अंक की उच्च वृद्धि की उम्मीद है।
बैंक, वित्त और बीमा (बीएफएसआई) को छोड़कर निफ्टी कंपनियों का कुल शुद्ध मुनाफा वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में 3.6 फीसदी बढ़ने का अनुमान है जो वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के 9.9 फीसदी और वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही के 10.5 फीसदी की वृद्धि से कम है।
बीएफएसआई और तेल एवं गैस कंपनियों को छोड़ दें तो सूचकांक की बाकी कंपनियों के कुल शुद्ध मुनाफे में इस दौरान महज 3.1 फीसदी की वृद्धि का अनुमान है जो पिछली 13 तिमाही में सबसे कम है। वित्त वष 2026 की तीसरी तिमाही में इन कंपनियों का कुल शुद्ध मुनाफा 11.1 फीसदी और वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में 17.3 फीसदी बढ़ा था। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा मूल्य बढ़ने से कंपनियों की आय में इजाफा हो सकता है।
ब्रोकरेज अनुमानों के अनुसार सूचकांक कंपनियों की कुल शुद्ध बिक्री या आय वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में 11.2 फीसदी बढ़ सकती है जो तीसरी तिमाही में 10.4 फीसदी और वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में 8.3 फीसदी बढ़ी थी।
यह विश्लेषण वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के लिए निफ्टी 50 सूचकांक की 47 कंपनियों के औसत आय अनुमान पर आधारित है। इसमें बाटलीवाला ऐंड करनी सिक्योरिटीज, जेएम फाइनैंशियल, मोतीलाल ओसवाल, नुवामा, ऐक्सिस सिक्योरिटीज और कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटी जैसे ब्रोकरेज शामिल हैं। इस नमूने से बाहर रखी गई कंपनियों में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, अदाणी एंटरप्राइजेज और जियो फाइनैंशियल सर्विसेज शामिल हैं।
युद्ध से जिंसों की कीमतों में वृद्धि का सबसे ज्यादा फायदा तेल एवं गैस उत्पादकों ओएनजीसी और रिलायंस इंडस्ट्रीज को होगा। इसके साथ ही खनन और धातु कंपनियों को इसका लाभ मिलेगा।
ब्रोकरेज के अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में ओएनजीसी और रिलायंस इंडस्ट्रीज की कुल शुद्ध बिक्री में 15.4 फीसदी का इजाफा हो सकता है जो तीसरी तिमाही में 6.2 फीसदी और वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में 5.8 फीसदी की वृद्धि से काफी अधिक है। इसी तरह सूचकांक का हिस्सा चार खनन और धातु कंपनियों की कुल शुद्ध बिक्री में वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में 10.3 फीसदी वृद्धि का अनुमान है जो तीसरी तिमाही में 7.8 फीसदी और वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में 2.4 फीसदी की वृद्धि से अधिक है।
बीएफएसआई, तेल एवं गैस और खनन तथा धातु कंपनियों को छोड़कर सूचकांक की अन्य कंपनियों की कुल शुद्ध बिक्री वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में 13.3 फीसदी बढ़ सकती है, जो तीसरी तिमाही में 15.6 फीसदी की वृद्धि से धीमी है मगर वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही के 11.3 फीसदी की वृद्धि से बेहतर है।
नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट के प्रतीक पारेख और प्रियंका शाह ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के लिए अपनी आय अनुमान की रिपोर्ट में लिखा है, ‘कंपनियों का मुनाफा नरम रह सकता है। कुल मुनाफा वृद्धि 8 से 9 फीसदी के आसपास सीमित रह सकती है।’