facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

Chemical Sector: 80% तक महंगे हुए केमिकल- निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?

Advertisement

महंगा कच्चा माल, घटता मुनाफा- कंपनियों के लिए मुश्किल समय

Last Updated- April 08, 2026 | 8:32 AM IST
Chemical Stocks

Chemical Sector: मार्च 2026 में कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमत में बड़ी तेजी देखी गई और यह औसतन 98.8 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जबकि फरवरी में यह 69.4 डॉलर थी। यह उछाल मुख्य रूप से अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की वजह से आया, जिससे वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ा।

तेल की कीमत बढ़ने का असर सीधे केमिकल सेक्टर पर पड़ा। मार्च में कई प्रमुख कच्चे माल जैसे ब्यूटाडीन और टोल्यून की कीमतों में क्रमशः 56% और 47% की बढ़ोतरी हुई। बेंजीन 12% और प्रोपिलीन 35% महंगा हुआ। वहीं एनिलीन 27% और एसीटोन में 80% की बड़ी छलांग देखी गई। IPA 70% और ACN 62% तक महंगे हो गए। एसीटिक एसिड की कीमत 9% बढ़ी, जबकि अमोनिया की कीमत 5% घटकर करीब 33 रुपये प्रति किलो रह गई। फिनोल और एसीटोन का मार्जिन भी बढ़कर 127 रुपये प्रति किलो पहुंच गया।

मिडिल ईस्ट संकट से सप्लाई चेन प्रभावित

मार्च 2026 से शुरू हुए मिडिल ईस्ट संकट ने ऊर्जा और कच्चे माल की सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने और बड़ी तेल कंपनियों की सप्लाई कटौती के कारण तेल की कीमतें एक ही महीने में करीब 43% तक बढ़ गईं। इसके साथ ही लॉजिस्टिक्स लागत भी बढ़ी और कई जहाज समुद्र में फंस गए, जिससे सप्लाई में और बाधा आई।

घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए भारत सरकार ने कमर्शियल गैस सप्लाई घटा दी, जिसका असर कंपनियों के उत्पादन पर पड़ा। कई कंपनियों को उत्पादन कम करना पड़ा या अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। इसी कारण Alkyl Amines ने 16 मार्च 2026 को LNG की कमी के चलते ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित कर दिया।

Chemical Sector की कंपनियों के नतीजों में हल्की बढ़त की उम्मीद

मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के अनुसार, 4QFY26 में केमिकल कंपनियों के प्रदर्शन में हल्की सुधार की उम्मीद है। बिक्री में लगभग 3%, EBITDA में 5% और मुनाफे में 4% की बढ़त का अनुमान है। मार्जिन में भी थोड़ा सुधार हो सकता है, खासकर कुछ कंपनियों में बेहतर प्रदर्शन के कारण।

चौथी तिमाही के पहले दो महीनों में ATLP, NFIL और GALSURF जैसी कुछ कंपनियों के निर्यात में बढ़त देखी गई, जबकि बाकी कंपनियों में गिरावट रही। इस दौरान रुपया भी डॉलर के मुकाबले करीब 2.5% कमजोर हुआ, जिससे निर्यात पर मिला-जुला असर पड़ा।

आगे सुधार की उम्मीद, लेकिन चुनौतियां बरकरार

आने वाले समय में केमिकल सेक्टर में धीरे-धीरे सुधार की संभावना है, जिसे स्पेशलिटी केमिकल्स की बढ़ती हिस्सेदारी, बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और आयात पर निर्भरता कम होने से समर्थन मिलेगा। वैश्विक मांग में सुधार भी मदद कर सकता है। हालांकि, निकट अवधि में दबाव बना रह सकता है क्योंकि चीन से ज्यादा सप्लाई और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।

लंबी अवधि में मजबूत Chemical Sector कंपनियां आगे रहेंगी

मध्यम अवधि में वही कंपनियां बेहतर प्रदर्शन करेंगी जिनके पास अलग तरह के प्रोडक्ट्स, मजबूत रिसर्च क्षमता और बेहतर इंटीग्रेशन है। निवेशकों के लिए जरूरी होगा कि वे नई परियोजनाओं की प्रगति, वैश्विक कीमतों का रुझान, कच्चे माल की लागत और मांग की स्थिति पर नजर बनाए रखें।

Advertisement
First Published - April 8, 2026 | 8:32 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement