अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी से आने वाली तिमाहियों में कंपनियों के मार्जिन में कमी और कुल मुनाफे में गिरावट आने की आशंका है। ऐतिहासिक रूप से कंपनियों के परिचालन मुनाफा मार्जिन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों के बीच मजबूत नकारात्मक संबंध रहा है।
पिछले कुछ साल में इन दोनों के बीच सह-संबंध काफी मजबूत रहा है। पिछले चार साल में बीएस-1000 कंपनियों के एबिटा मार्जिन, जिसे परिचालन मार्जिन भी कहा जाता है, में लगातार बढ़ोतरी हुई है और इसी दौरान कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट भी आई है। बीएस-1000 भारत की सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों, बैंकों, फाइनैंस और बीमा कंपनियों को छोड़कर, की सालाना लिस्ट है, जिन्हें उनके सालाना राजस्व के हिसाब से क्रमबद्ध किया जाता है।
उदाहरण के लिए, बीएस-1000 कंपनियों का परिचालन मार्जिन वित्त वर्ष 2023 में 15.1 प्रतिशत (राजस्व का) से बढ़कर अप्रैल-दिसंबर 2025 की अवधि के दौरान रिकॉर्ड ऊंचाई 19 प्रतिशत पर पहुंच गया। इस अवधि में कच्चे तेल की कीमतें वित्त वर्ष 2023 के औसत 95.3 डॉलर प्रति बैरल से 32 प्रतिशत बढ़कर वित्त वर्ष 2026 के 9 महीनों के दौरान 64.8 डॉलर हो गई।
इसके विपरीत, जब वित्त वर्ष 2021 और वित्त वर्ष 2023 के दौरान कच्चे तेल की कीमतें दोगुनी से भी ज्यादा हो गई थीं, तो कॉरपोरेट मार्जिन इस दौरान लगभग 390 आधार अंक गिरकर वित्त वर्ष 2021 में 19.01 प्रतिशत से वित्त वर्ष 2023 में 15.13 प्रतिशत पर आ गया था।
इसके विपरीत, वित्त वर्ष 2020 में कच्चे तेल की कीमतें और कॉरपोरेट मार्जिन दोनों में ही गिरावट आई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कोविड-19 महामारी के कारण वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में भारी कमी आ गई थी, जिससे कॉरपोरेट कमाई और ऊर्जा की मांग पर बुरा असर पड़ा।
सिस्टमेटिक्स ग्रुप में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और संस्थागत इक्विटीज के को-हेड धनंजय सिन्हा ने कहा, ‘कच्चे तेल की कीमतों में 40 फीसदी की बढ़ोतरी (औसतन 100 डॉलर प्रति बैरल तक) से कच्चे माल की लागत लगभग 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। यह बिक्री में संभावित 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी से ज्यादा होगी और परिचालन मार्जिन को 36 प्रतिशत तक कम कर सकती है। गैर-वित्तीय कंपनियों के लिए मुख्य परिचालन मार्जिन (दूसरी आय को छोड़कर) मौजूदा 15 प्रतिशत के स्तर से घटकर 8 प्रतिशत के आस-पास आ सकता है, जिससे कमाई में सीधे तौर पर कमी आने का खतरा पैदा हो सकता है।’
इस स्थिति में, गैर-वित्तीय क्षेत्र की कंपनियों का कुल मुनाफा मौजूदा स्तरों से संभावित रूप से आधा हो सकता है।