औषधि विभाग के सचिव मनोज जोशी ने कहा कि सरकार बल्क ड्रग्स उद्योग के लिए नई सहायता योजना पर काम कर रही है। साथ ही उन्होंने पश्चिम एशिया संकट की वजह से लागत बढ़ने के बावजूद दवाओं की कीमतों में एकमुश्त बढ़ोतरी की संभावना को खारिज कर दिया।
बिज़नेस स्टैंडर्ड को दिए साक्षात्कार में जोशी ने कहा कि प्रस्तावित योजना उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) दृष्टिकोण से आगे बढ़कर दीर्घकालिक क्षमता निर्माण, अनुसंधान और विकास तथा मजबूत अकादमिक-उद्योग साझेदारी पर ध्यान केंद्रित करेगी।
जोशी ने कहा, ‘हम बल्क ड्रग्स की खोज और विकास के लिए नई व्यापक सहायता योजना पर काम कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि यह ढांचा उन कंपनियों के लिए लंबी कार्यान्वयन अवधि प्रदान करेगा जो संयंत्र स्थापित कर रही हैं, साथ ही उन्हें उत्पाद विकास के लिए अधिक लचीली सहायता मिलेगी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत आवश्यक दवा सामग्री के लिए आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू विनिर्माण क्षमता को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। जोशी के अनुसार सरकार का मकसद अनुदान, बुनियादी ढांचा शोध एवं विकास में मदद और उन्नत न्यूनतम आयात मूल्य प्रणाली के जरिये इस क्षेत्र को सहायता प्रदान करना है।।
आपूर्ति श्रृंखला के बारे में जोशी ने कहा कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव की वजह से आई रुकावटों के बावजूद भारत का फार्मा उद्योग काफी हद तक मजबूत बना रहा। हालांकि शुरुआत में कुछ सॉल्वेंट और ऐक्टिव फार्मास्युटिकल इनग्रीडिएंट्स (एपीआई) की कमी देखी गई थी लेकिन बाद में आपूर्ति स्थिर हो गई।
मेथनॉल, अमोनिया और प्रोपलीन जैसे कच्चे माल की आपूर्ति सामान्य हो गई है। हालांकि कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल की ज्यादा कीमतों की वजह से विनिर्माण, पैकेजिंग और मालवहन की लागत बढ़ गई है। कुछ दवाओं के लिए कच्चे माल की लागत में 20 से 30 फीसदी की वृद्धि हुई है लेकिन उद्योग ने लागत में बढ़ोतरी का भार अभी तक ग्राहकों पर नहीं डाला है।
जोशी ने कहा कि इससे सरकार दवा कीमतों में कोई आपातकालीन या व्यापक बढ़ोतरी करने पर विचार नहीं कर रही है। मगर अप्रत्याशित बढ़ोतरी वाले कुछ मामलों की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि 10,000 करोड़ रुपये का ‘मिशन बायोफार्मा शक्ति’ मंजूरी की प्रक्रिया में है और पीआरआईपी इनोवेशन योजना के तहत 720 करोड़ रुपये की 22 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है।