facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

ऑफिस स्पेस की मांग, FTA से तेज होगी रफ्तार; 50% तक पहुंच सकता है GCC का योगदान: रिपोर्ट

Advertisement

टैरिफ छूट और भारत-ईयू व्यापार समझौते में सुनिश्चित बाजार पहुंच इन कंपनियों को भारत में ऑफिस स्पेस के लिए और आकर्षित कर सकती है।

Last Updated- February 19, 2026 | 3:50 PM IST
Office Space

भारत का ऑफिस स्पेस मार्केट लगातार बढ़ रहा है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) भारत की ऑफिस स्पेस मांग में अहम योगदान दे रहे हैं और आगे इनका योगदान बढ़कर 50 फीसदी हो सकता है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से ऑफिस मार्केट की रफ्तार और तेज हो सकती है क्योंकि FTA के कारण विदेशी कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने अपने ऑफिस भारत में खोलने की संभावना है।

रियल्टी रिसर्च फर्म कॉलियर्स इंडिया का कहना है कि भारत में अमेरिका, यूरोपीय संघ (EU) और यूके के साथ किए गए हाल के व्यापार समझौतों से विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जो विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों, विशेष रूप से GCC में रियल एस्टेट की मांग को बढ़ा सकते हैं। इन समझौतों के तहत भारत में ग्रेड A ऑफिस स्पेस की वार्षिक मांग में वृद्धि हो सकती है।

कॉलियर्स इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर ( ऑफिस सर्विसेज) अर्पित मेहरोत्रा का कहना है कि आने वाले कुछ वर्षों में GCC द्वारा 350 से 400 लाख वर्ग फुट की वार्षिक लीजिंग हो सकती है, जो कुल ऑफिस स्पेस की मांग का 40 से 50% हिस्सा होगी। हालांकि, टेक्नोलॉजी आधारित GCC की मांग अमेरिकी कंपनियों से स्थिर हो सकती है, लेकिन यूरोपीय और यूके कंपनियों से खासकर इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग, BFSI और कंसल्टिंग क्षेत्रों में अधिक मांग देखने को मिल सकती है।

Also Read: बड़े फ्लैट्स की दौड़! क्या अब फ्लैट बन गए हैं स्टेटस सिंबल, लग्जरी हाउसिंग में उफान

 7 शहरों में ग्रेड A ऑफिस स्पेस मांग में बड़ा हिस्सा

भारत का ऑफिस मार्केट पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ा है, खासकर महामारी के बाद। यह वृद्धि मुख्य रूप से GCC द्वारा प्रेरित रही है, जिन्होंने अब केवल लागत-लाभ केंद्रों से परे जाकर नवाचार-प्रेरित, वैश्विक रूप से एकीकृत ज्ञान और शोध केंद्रों में खुद को बदला है। 2020 से अब तक 31 करोड वर्ग फुट ऑफिस स्पेस की कुल मांग में से GCC ने लगभग 11.7 करोड़ वर्ग फुट ऑफिस स्पेस का योगदान दिया, जो भारत में कुल लीज़िंग गतिविधि का 38% है। GCC की मांग में निरंतर वृद्धि हो रही है, 2020 में जहां लगभग 160 लाख वर्ग फुट स्पेस लिया गया था, वहीं 2025 तक यह आंकड़ा 300 लाख वर्ग फुट के करीब पहुंचने की संभावना है। इस अवधि में, GCC का भारत की कुल लीज़िंग गतिविधि में हिस्सा कुछ साल पहले के 30% से बढ़कर 2025 में 40% से ऊपर हो गया है, जो उनके निरंतर विकास और बदलते रोल को साबित करता है।

कॉलियर्स इंडिया में नेशनल डायरेक्टर और हेड ऑफ रिसर्च विमल नादर कहते हैं कि हालांकि GCC लीज़िंग अभी भी मुख्य रूप से टेक्नोलॉजी क्षेत्र द्वारा संचालित होगी, लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि यह मांग और अधिक विविध होगी। BFSI और इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां 2026 तक ऑफिस स्पेस की कुल मांग में 40-50% योगदान देंगी।

भारत में यूएस, यूके और ईयू के GCC से मांग में अलग-अलग पैटर्न देखने को मिल रहे हैं, जो भारतीय ऑफिस स्पेस बाजार में विविधता को बढ़ावा दे रहे हैं। यूएस स्थित GCC की प्रमुख मांग में तकनीकी कंपनियों का दबदबा (यूएस आधारित GCC लीजिंग का 47% हिस्सा) है। इसके अलावा BFSI कंपनियों की भी महत्वपूर्ण उपस्थिति (21% हिस्सा) है। ये कंपनियां भारत में ऑफिस स्पेस की प्रमुख मांग उत्पन्न कर रही हैं, खासकर टेक्नोलॉजी और फाइनेंशियल सेवाओं के क्षेत्र में। ईयू स्थित GCC की प्रमुख मांग में इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर (लगभग 60% हिस्सा) का बोलबाला है।

टैरिफ छूट और भारत-ईयू व्यापार समझौते में सुनिश्चित बाजार पहुंच इन कंपनियों को भारत में ऑफिस स्पेस के लिए और आकर्षित कर सकती है। यूके स्थित GCC की प्रमुख मांग में BFSI कंपनियों का दबदबा (29% हिस्सा) है और इसके बाद कंसल्टिंग कंपनियों की भी अहम उपस्थिति (23% हिस्सा) है। इन कंपनियों की उपस्थिति से भारतीय ऑफिस स्पेस बाजार में एक विविधता आई है, जो विभिन्न उद्योगों से संबंधित है। अमेरिका, यूरोपीय संघ और यूके में स्थित GCC ने 2020 से अब तक भारत में कुल ऑफिस स्पेस की मांग का लगभग एक-तिहाई हिस्सा दे रहे हैं।

Advertisement
First Published - February 19, 2026 | 3:25 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement