वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय रियल एस्टेट में सेंटिमेंट अब नरम पड़ गया है। जनवरी-मार्च 2026 (Q1 2026) के लिए जारी Knight Frank–NAREDCO रियल एस्टेट सेंटिमेंट इंडेक्स के 48वें संस्करण में रियल एस्टेट सेक्टर में पिछले कुछ वर्षों से बने आशावाद में कमी के संकेत मिले हैं। बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं, महंगाई और ऊर्जा कीमतों के दबाव ने सेक्टर के माहौल को प्रभावित किया है। यह इंडेक्स दिखाता है कि भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर इस समय संक्रमण के दौर में है। रिहायशी बाजार टिकाऊ गति की ओर बढ़ रहा है, जबकि ऑफिस सेगमेंट विकास की धुरी बना हुआ है। आगे का रुख काफी हद तक वैश्विक ऊर्जा बाजार और भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा, जो निवेश फैसलों और रिकवरी की रफ्तार तय करेंगे। सर्वे में डेवलपर्स, वित्तीय संस्थानों और निवेशकों की राय शामिल है।
इस इंडेक्स के अनुसार, करंट सेंटिमेंट स्कोर (Current Sentiment Score) Q4 2025 के 60 अंकों से घटकर Q1 2026 में 49 पर आ गया, जो निराशावादी स्तर दर्शाता है। वहीं फ्यूचर सेंटिमेंट स्कोर भी 61 से घटकर 50 पर आ गया, जो तटस्थ स्थिति को दिखाता है। 50 अंक को तटस्थ , 50 से ऊपर सकारात्मक और 50 से नीचे को नकारात्मक भावना माना जाता है।
नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर शिशिर बैजल ने कहा, ‘सेंटिमेंट में यह नरमी वैश्विक अनिश्चितताओं के बढ़ते प्रभाव को दिखाती है खासकर ऊर्जा बाजार में व्यवधान और भू-राजनीतिक तनाव। भारत की आर्थिक बुनियाद अब भी मजबूत है, लेकिन रियल एस्टेट सेक्टर अब सावधानी के साथ संतुलन के दौर में प्रवेश कर रहा है। रिहायशी सेगमेंट में तेज वृद्धि के बाद स्वाभाविक नरमी दिख रही है, जबकि ऑफिस मार्केट मजबूत मांग के कारण टिकाऊ बना हुआ है। निकट भविष्य में हितधारक बदलते आर्थिक माहौल को देखते हुए ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में रह सकते हैं।’
लंबे समय तक तेजी देखने के बाद रिहायशी बाजार अब संतुलन की ओर बढ़ता दिख रहा है। इस सर्वे में कहा गया है कि 52% उत्तरदाताओं को उम्मीद है कि मकानों की बिक्री घट सकती है और नए प्रोजेक्ट लॉन्च की रफ्तार भी धीमी पड़ रही है। लगभग आधे हितधारकों को कम नए लॉन्च की उम्मीद है, जबकि कई स्थिर स्थिति की संभावना देख रहे हैं। डेवलपर्स अब पहले से ज्यादा सतर्क हो गए हैं। यह रुझान 2025 की शुरुआत में दिखी तेज लॉन्च गतिविधियों से अलग है। इसके विपरीत मांग कमजोर होने के बावजूद मकानों की कीमतें अभी भी मजबूत बनी हुई हैं। 73% उत्तरदाताओं का मानना है कि कीमतें या तो बढ़ेंगी या स्थिर रहेंगी, जबकि केवल 27% गिरावट की उम्मीद कर रहे हैं। मांग में नरमी और कीमतों की मजबूती के बीच यह अंतर साफ दिखाता है कि रिहायशी बाजार इस समय बढ़ती संरचनात्मक लागतों से प्रभावित हो रहा है।
नारेडको के नेशनल प्रेसिडेंट प्रवीन जैन ने कहा कि वैश्विक आर्थिक दबाव और महंगाई के कारण रियल एस्टेट सेंटिमेंट में नरमी आई है। लेकिन यह रिहायशी बाजार की बुनियादी मजबूती में कमी नहीं, बल्कि हितधारकों की अल्पकालिक सतर्कता को दर्शाता है। रिहायशी सेगमेंट में जो नरमी दिख रही है, वह लंबे समय तक चली तेज वृद्धि के बाद स्वाभाविक संतुलन का हिस्सा है। एंड-यूजर की मांग और कीमतों में स्थिर बढ़ोतरी अब भी बाजार को मजबूती दे रही है।
रिहायशी सेगमेंट के विपरीत ऑफिस सेगमेंट सेक्टर की मजबूती का आधार बना हुआ है। Q1 2026 में ऑफिस लीजिंग रिकॉर्ड स्तर पर रही। 41% उत्तरदाता सुधार और 36% स्थिर मांग की उम्मीद कर रहे हैं। प्रीमियम ग्रेड-A स्पेस की सीमित उपलब्धता और ग्लोबल केपेबिलिटी सेंटर की बढ़ती मांग ने किरायों को मजबूती दी है। 81% उत्तरदाताओं को उम्मीद है कि किराए बढ़ेंगे या स्थिर रहेंगे। जैन ने कहा कि कमर्शियल सेगमेंट अब भी मजबूती का प्रमुख क्षेत्र बना हुआ है। लीजिंग गतिविधियां स्थिर से बेहतर हो रही हैं और किराए के रुझान मजबूत बने हुए हैं, जो ऑफिस स्पेस की मांग को दिखाता है।
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इस इंडेक्स के मुताबिक वित्तीय संस्थानों और निवेशकों जैसे गैर-डेवलपर समूहों का भरोसा काफी घटा है। गैर-डेवलपर हितधारकों जैसे निवेशकों और वित्तीय संस्थानों का फ्यूचर सेंटिमेंट स्कोर Q4 2025 के 63 से गिरकर 50 पर आ गया है, जबकि डेवलपर्स का स्कोर 58 से घटकर 51 हुआ है। इससे संकेत मिलता है कि पूंजी उपलब्ध कराने वाले पक्ष अब जोखिम को लेकर अधिक संवेदनशील हो गए हैं, जबकि डेवलपर्स अब भी सावधानी के साथ आशावादी बने हुए हैं।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बढ़ने से हितधारक पहले की तुलना में ज्यादा सतर्क हो गए हैं। अब केवल 29% उत्तरदाता आर्थिक सुधार की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि 50% को लगता है कि अगले छह महीनों में हालात बिगड़ सकते हैं। करीब 21% स्थिर स्थिति की संभावना देख रहे हैं। इससे साफ है कि पहले की संतुलित सोच की जगह अब सावधानी ने ले ली है। महंगाई, ऊंची ऊर्जा कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव इसके प्रमुख कारण हैं।
फंडिंग का आउटलुक स्थिर लेकिन सतर्क है। लगभग 33% को फंड आसानी से मिलने की उम्मीद है, जबकि 43% को कोई खास बदलाव नहीं दिखता। इससे संकेत मिलता है कि निकट भविष्य में तरलता की स्थिति सामान्य रह सकती है। हालांकि 24% उत्तरदाताओं को फंडिंग सख्त होने की आशंका है, जो निवेशकों और वित्तीय संस्थानों में बढ़ती जोखिम-सतर्कता को दर्शाता है। इसका मतलब है कि अब निवेश अधिक चयनात्मक होंगे, अच्छी गुणवत्ता वाली संपत्तियों पर जोर रहेगा और कीमतों को लेकर ज्यादा सावधानी बरती जाएगी। तेज विस्तार की जगह अब अधिक अनुशासित रणनीति अपनाई जा रही है।