वैश्विक प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी नाइट फ्रैंक की ताजा वेल्थ रिपोर्ट भारत के लिए बड़ी खबर लेकर आई है। रिपोर्ट के मुताबिक 30 मिलियन डॉलर (लगभग ₹250 करोड़) से अधिक संपत्ति रखने वालों की संख्या के आधार पर भारत अब दुनिया का छठा सबसे बड़ा देश बन गया है। 2021 से 2026 के बीच भारत में ऐसे अल्ट्रा हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल (UHNWI) यानी अल्ट्रा रिच की संख्या तेजी से बढ़ी है। भारत में एक तिहाई से अधिक अति अमीर मुंबई में रहते हैं।
Knight Frank ने गुरुवार को अपनी 20वीं Wealth Report जारी की। रिपोर्ट के अनुसार भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, ब्याज दरों में बढ़ोतरी की चिंताओं और असमान आर्थिक प्रदर्शन के बावजूद दुनिया भर में संपत्ति सृजन की रफ्तार तेज रही है। 2021 से 2026 के बीच वैश्विक UHNWI (30 मिलियन डॉलर से अधिक संपत्ति) की संख्या 1,62,191 बढ़ी और औसतन रोज 89 नए UHNWI जुड़ रहे हैं। जिससे कुल संख्या बढ़कर 7,13,626 हो गई।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 30 मिलियन डॉलर से अधिक संपत्ति वाले लोगों की संख्या 2021 से 2026 के बीच 63% बढ़कर 19,877 पर पहुंच गई। यह वृद्धि टेक्नोलॉजी, इंडस्ट्रियल और पूंजी बाजारों में तेजी से वेल्थ क्रिएशन को दर्शाती है। अब भारत दुनिया में UHNWI आबादी के मामले में छठे स्थान पर है। नाइट फ्रैंक के Wealth Sizing Model के अनुसार 2031 तक भारत में अति अमीरों की संख्या मौजूदा स्तर से 27% बढ़कर 25,217 होने का अनुमान है।
रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में भारत के 35.4% अल्ट्रा रिच रहते हैं। पिछले 10 वर्षों में दिल्ली और चेन्नई का योगदान 3% बढ़ा है, जबकि 2015 से हैदराबाद का योगदान 1.3% बढ़ा है। नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन और एमडी शिशिर बैजल ने कहा कि भारत में अल्ट्रा-हाई-नेटवर्थ वर्ग के परिदृश्य में मुंबई की निरंतर बढ़त देश में वेल्थ किएशन के ढांचे में आए गहरे संरचनात्मक बदलाव को दर्शाती है। मुंबई खासतौर पर भारत की वित्तीय धुरी होने के कारण लाभ में है, जहां कारोबार, जीवनशैली तंत्र और प्रीमियम रियल एस्टेट की निकटता एक मजबूत मूल्य प्रस्ताव तैयार करती है।
बैजल ने कहा कि आगे चलकर जैसे-जैसे भारत में अल्ट्रा हाई नेटवर्थ ( UHNW) वर्ग का विस्तार होगा और शहरी बुनियादी ढांचा सुधरेगा। जिससे मुंबई जैसे शहरों में लग्जरी रियल एस्टेट बाजार और गहराई हासिल करेगा। मांग अधिक एंड-यूजर आधारित होगी और गुणवत्ता व कीमत दोनों के लिहाज से वैश्विक मानकों के अनुरूप होती जाएगी।
पिछले पांच वर्षों में भारत में अरबपतियों की संख्या 58% बढ़कर 2026 में 207 हो गई। जिससे भारत अमेरिका (914) और चीन (485) के बाद तीसरे स्थान पर है। 2031 तक यह संख्या 51% बढ़कर 313 होने का अनुमान है। वैश्विक अरबपतियों में भारत की हिस्सेदारी 6.7% से बढ़कर 8% होने की उम्मीद है।
शिशिर बैजल ने कहा कि भारत का संपन्न वर्ग देश के आर्थिक विकास, डिजिटलाइजेशन, सूचीबद्ध इक्विटी, निजी पूंजी और पारिवारिक व्यवसायों के विस्तार का प्रतिबिंब है। नाइट फ्रैंक के ग्लोबल रिसर्च हेड लियाम बेली ने कहा कि वैश्विक संपत्ति वितरण में बड़ा बदलाव दिख रहा है, जहां अमेरिका के साथ भारत भी तेजी से उभर रहा है।
रिपोर्ट में Prime International Residential Index (PIRI 100) के निष्कर्ष भी शामिल हैं, जो 100 वैश्विक लग्जरी हाउसिंग बाजारों में कीमतों के प्रदर्शन को मापता है। बेंगलुरु 2024 में 40वें स्थान से 2025 में 8वें स्थान पर पहुंच गया और लग्जरी कीमतों में 9.4% वृद्धि दर्ज की गई। मुंबई 8.7 फीसदी कीमतों में वृद्धि के साथ 21वें से 10वें स्थान पर पहुंच गया, जबकि दिल्ली 18वें से 17वें स्थान पर फिसल गया। दिल्ली में लग्जरी संपत्ति की कीमतों में 6.9 फीसदी इजाफा हुआ।
PIRI 100: लग्जरी रिहायशी बाजारों का प्रदर्शन (2024–2025)
| रैंक | शहर | वार्षिक बदलाव (% में) |
|---|---|---|
| 1 | टोक्यो | 58.5% |
| 2 | दुबई | 25.1% |
| 3 | मनीला | 17.5% |
| 4 | सियोल | 14.7% |
| 5 | प्राग | 14.6% |
| 6 | केमैन आइलैंड्स | 11.0% |
| 7 | मेक्सिको सिटी | 9.4% |
| 8 | बेंगलुरु | 9.4% |
| 9 | मेरिबेल | 9.0% |
| 10 | मुंबई | 8.7% |
| 11 | पोर्टो | 8.5% |
| 12 | मार्बेला | 8.1% |
| 17 | दिल्ली | 6.9% |
(स्रोत: नाइट फ्रैंक – द वेल्थ रिपोर्ट 2025 (PIRI 100) | *सभी कीमतों में बदलाव स्थानीय मुद्रा में हैं)
नाइट फ्रैंक के Prime International Residential Index 100 (PIRI 100) ट्रैकर के अनुसार 2025 में प्राइम रिहायशी संपत्ति के लिहाज से Monaco दुनिया का सबसे महंगा शहर बना हुआ है, जहां 1 मिलियन डॉलर में केवल 16 वर्गमीटर जगह खरीदी जा सकती है। इसके बाद Hong Kong (23 वर्गमीटर) और Geneva (28 वर्गमीटर) का स्थान है।
भारत भी इस मामले में ठीक स्थिति में है। लेकिन यहां जगह घट रही है। मुंबई में 2025 में 1 मिलियन डॉलर में 96 वर्गमीटर प्राइम रिहायशी संपत्ति खरीदी जा सकती है, जो 2024 के 99 वर्गमीटर की तुलना में 3% कम है। दिल्ली में यह आंकड़ा 208 वर्गमीटर से घटकर 205 वर्गमीटर (1.4% कमी) रह गया।
वहीं बेंगलुरु में 2024 के 370 वर्गमीटर से घटकर 2025 में 357 वर्गमीटर (3.5% कमी) रह गया। रुपये में लगभग 4.3% की गिरावट से विदेशी खरीदारों को प्रति डॉलर अधिक रुपये जरूर मिले। लेकिन इन तीनों शहरों में प्राइम प्रॉपर्टी की कीमतें (मुंबई 8.7%, दिल्ली 6.9% और बेंगलूरु 9.4%) इससे कहीं तेज बढ़ीं। नतीजतन मुद्रा लाभ के बावजूद 1 मिलियन डॉलर में खरीदी जा सकने वाली कुल जगह कम हो गई क्योंकि कीमतों में बढ़ोतरी रुपये की कमजोरी से अधिक रही।
1 मिलियन डॉलर में खरीदी जा सकने वाली प्रॉपर्टी (वर्गमीटर में, 5 साल की तुलना)
| शहर | Q4 2025 | Q4 2024 | Q4 2023 | Q4 2022 | Q4 2021 | Q4 2020 |
|---|---|---|---|---|---|---|
| मुंबई | 96 | 99 | 103 | 113 | 108 | 106 |
| दिल्ली | 205 | 208 | 217 | 226 | 206 | 202 |
| बेंगलुरु | 357 | 370 | 377 | 385 | 357 | 351 |
(स्रोत: नाइट फ्रैंक रिसर्च)