भारत के रियल एस्टेट कैपिटल मार्केट ने वित्त वर्ष 2026 में जबरदस्त वापसी की। पिछले दो वर्षों की धीमी गतिविधियों को पीछे छोड़ते हुए यह मार्केट वित्त वर्ष 2022 के स्तर के करीब पहुंच गए। ANAROCK Capital की ‘FLUX FY26 Annual Edition रिपोर्ट’ के अनुसार, इस क्षेत्र में कुल डील वैल्यू 4.3 अरब डॉलर रही, जो वित्त वर्ष 2024 और वित्त वर्ष 2025 की तुलना में क्रमशः 13% और 16% ज्यादा है। यह बढ़ोतरी एक अधिक संतुलित और व्यापक डील माहौल के कारण संभव हुई।
ANAROCK Capital के सीईओ शोभित अग्रवाल ने कहा कि भारत के रियल एस्टेट कैपिटल मार्केट अब एक सीमित और सतर्क दौर से निकलकर व्यापकता और विश्वास के चरण में प्रवेश कर चुके हैं। वित्त वर्ष 2026 की रिकवरी की सबसे बड़ी खासियत इसकी गुणवत्ता है। वित्त वर्ष 24 और वित्त वर्ष 25 में जहां एक-एक बड़ी डील (जैसे Brookfield RE Trust/GIC व RIL/ADIA/KKR) कुल डील वैल्यू का बड़ा हिस्सा थीं, वहीं वित्त वर्ष 26 में सबसे बड़ी डील कुल गतिविधि का केवल 9% रही। इससे बाजार की संरचना में सुधार और निवेश के बेहतर वितरण का संकेत मिलता है।
वित्त वर्ष 26 में कुल 60 ट्रांजैक्शन हुए, जो पिछले 7 वर्षों में सबसे अधिक हैं (वित्त वर्ष 25 में 41 डील थीं)। औसत डील साइज 710 लाख डॉलर रहा, जो इस अवधि में सबसे कम है। लेकिन यह घटती रुचि नहीं, बल्कि अधिक निवेशकों की भागीदारी को दर्शाता है।
वित्त वर्ष 26 में कुल डील वैल्यू का लगभग 77% इक्विटी के रूप में रहा, जबकि 23% डेट था। कोई हाइब्रिड डील दर्ज नहीं हुई। वही कमर्शियल ऑफिस सेक्टर सबसे मजबूत रहा। इस सेक्टर में 14 डील हुईं, जिनकी वैल्यू 1.6 अरब डॉलर थी और औसत डील साइज 11.6 करोड डॉलर था। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) की मांग ने इस सेक्टर में निवेशकों का विश्वास बढ़ाया। खास बात यह रही कि घरेलू निवेशकों की भागीदारी भी बढ़ी।
रिटेल रियल एस्टेट ने वित्त वर्ष 26 में कुल डील वैल्यू का 9% योगदान दिया, जबकि वित्त वर्ष 24 और वित्त वर्ष 25 में यह लगभग न के बराबर था। Blackstone द्वारा कोलकाता के South City Mall का 37.7 करोड़ डॉलर में अधिग्रहण वर्ष की सबसे बड़ी इक्विटी डील रही।
रेजिडेंशियल सेक्टर में 26 डील हुई और औसत साइज 250 लाख डॉलर रहा। बैंकिंग सेक्टर से सस्ता फंडिंग विकल्प मिलने के बावजूद संस्थागत निवेश जारी रहा। इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में वित्त वर्ष 25 के 47% से घटकर वित्त वर्ष 26 में 10% रह गई। लेकिन ई-कॉमर्स के चलते मांग मजबूत बनी हुई है।
ANAROCK Capital ( investment advisory) के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के आशीष अग्रवाल के अनुसार विदेशी निवेश का हिस्सा वित्त वर्ष 22 के 82% से घटकर वित्त वर्ष 26 में 52% हो गया। घरेलू निवेश का हिस्सा 15% से बढ़कर 38% हुआ। कुल घरेलू निवेश 1.64 अरब डॉलर (7 वर्षों में सबसे अधिक) रहा। यह बदलाव भारत में बढ़ती समृद्धि, पारदर्शिता और रियल एस्टेट में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
वित्त वर्ष 26 में शहर-आधारित निवेश गतिविधियों में NCR (नेशनल कैपिटल रीजन) ने 23% हिस्सेदारी के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। इसके बाद MMR (मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन) की 17%, बेंगलुरु की 13%, चेन्नई की 9% हिस्सेदारी रही।
कोलकाता ने उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया, जहां वित्त वर्ष 25 में 0% हिस्सेदारी से बढ़कर वित्त वर्ष 26 में 9% हो गई। इसका मुख्य कारण South City Mall का बड़ा अधिग्रहण रहा।वहीं, Pan-India (मल्टी-सिटी) डील्स का हिस्सा वित्त वर्ष 25 के 50% से घटकर वित्त वर्ष 26 में केवल 18% रह गया। यह संकेत देता है कि अब निवेशक अधिक शहर-विशिष्ट रणनीति अपना रहे हैं और अलग-अलग शहरों में अवसरों के आधार पर पूंजी निवेश कर रहे हैं।
वित्त वर्ष 2026 में प्लेटफॉर्म निवेश का ट्रेंड जारी रहा। HDFC Capital ने कई प्लेटफॉर्म्स में निवेश किया, जैसे Eldeco, Hero Realty और Curated Living Solutions। रेंटल हाउसिंग और लक्जरी सेकंड होम्स जैसे नए सेगमेंट में भी प्लेटफॉर्म उभरे।