रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (रीट्स) और इन्फ्रास्ट्र्क्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनविट्स) को बैंक अब यह देखकर कर्ज देंगे कि उनकी संपत्तियों में नकदी की आवक कैसी है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रीट्स और इनविट्स के अंतिम संशोधन दिशानिर्देशों के मसौदे से वह शर्त निकाल दी है, जिसमें ऐसे ट्रस्ट को काम करते हुए तीन साल पूरे होने के बाद ही बैंक से कर्ज मिल सकता था।
रीट्स और इनविट्स को बैंक कर्ज के बारे में अंतिम संशोधित नियम आज जारी किए गए और 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। लेकिन बैंकों ने इनविट्स को जो कर्ज पहले दे दिए हैं, वे कर्ज इन नियमों के मुताबिक नहीं होने पर भी अवधि पूरी होने तक चलते रहेंगे। नए नियमों के अनुसार रीट्स या इनविट की कम से कम 80 प्रतिशत परिसंपत्तियों से पिछले एक वर्ष से लगातार सकारात्मक नकदी आय होनी चाहिए। साथ ही बैंक केवल उन इकाइयों को कर्ज दे सकेंगे जो शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं।
आरबीआई ने कहा है कि रीट्स को दिए गए कर्ज को वाणिज्यिक अचल संपत्ति (सीआरई) को दिया कर्ज माना जाएगा और उस पर 100 प्रतिशत जोखिम भार लागू होगा। कर्ज पूंजी बाजार से जुड़ा माना गया तब जोखिम भार 125 प्रतिशत होगा।
केंद्रीय बैंक ने कहा है कि बैंक अपने कारोबारी मॉडल के अनुसार रियल एस्टेट क्षेत्र की विभिन्न उप-श्रेणियों के लिए कुल निवेश और कर्ज की आंतरिक सीमाएं तय करें। बैंक का रीट्स के लिए कुल कर्ज उसके पूंजी आधार के 10 प्रतिशत के भीतर ही रहना चाहिए।
उसने यह भी कहा कि वाणिज्यिक बैंक रीट्स को अधिग्रहण करने के लिए कर्ज दे सकते हैं। इससे इन्हें इनविट्स के बराबर सुविधा मिल गई है। किंतु रीट्स और इनविट्स को अधिग्रहण के लिए यदि वाणिज्यिक बैंक कर्ज देते हैं तो उनके लिए अलग व्यवस्था तय की गई है। लघु वित्त बैंक इनविट्स को अधिग्रहण के लिए कर्ज नहीं दे सकते।
केंद्रीय बैंक ने मसौदे से वह शर्त भी हटा दी, जिसमें कहा गया था कि पिछले तीन वर्षों में रीट्स और इनविट के खिलाफ कोई बड़ी नियामकीय कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उसकी जगह बैंक खुद जांचेंगे कि ऐसी किसी कार्रवाई का कर्ज लेने वाली संस्था की साख पर क्या असर पड़ा है।
आरबीआई ने प्रस्ताव की वह शर्त बरकरार रखी है, जिसके मुताबिक किसी रीट या इनविट और उसकी विशेष प्रयोजन वाली कंपनियों (एसपीवी) में सभी बैंकों का कुल कर्ज उस ट्रस्ट की कुल परिसंपत्तियों के मूल्य के 49 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकता। इसके अनुपालन के लिए बैंक उसकी संपत्तियों की हालिया सालाना या छमाही मूल्यांकन रिपोर्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं।
केंद्रीय बैंक ने रीट्स और इनविट्स को दिए जाने वाले बैंक कर्ज के लिए एकमुश्त या अंत में बड़ी राशि चुकाने वाली व्यवस्था पर रोक भी जारी रखी है। मगर यह रोक ऐसे ट्रस्ट द्वारा जारी किए गए बॉन्ड, डिबेंचर या वाणिज्यिक पत्रों में किए गए बैंकों के निवेश पर लागू नहीं होगी। हालांकि स्पष्ट किया गया है कि नकदी आवक का अनुमान लगाकर कर्ज चुकाने की मियाद को उसके हिसाब से बदला नहीं जा सकता है।