वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में प्रमुख सूचीबद्ध रियल एस्टेट डेवलपर प्री-सेल्स का मिल-जुला प्रदर्शन कर सकते हैं। इसका कारण नियोजित परियोजनाएं शुरू करने में देरी और कमजोर मनोबल है। पश्चिम एशिया युद्ध ने व्यापक आर्थिक माहौल को अनिश्चित बना दिया है जिसका असर इन पर हो सकता है।
एम्बिट कैपिटल में मिड-स्मॉल कैप, रियल एस्टेट, विमानन और प्रॉपर्टीज के मुख्य विश्लेषक करण खन्ना ने कहा, ‘भू-राजनीतिक तनाव शुरू होने से पहले की उम्मीदों की तुलना में वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही का प्रदर्शन अपेक्षाकृत धीमा रहेगा। मार्च के लिए तय कई लॉन्चिंग में देरी हुई है और जो लॉन्चिंग भी हउ है, उस पर भय के आम माहौल का असर आया होगा। प्रमुख भारतीय शहरों और प्रमुख डेवलपरों में बिक्री में नरमी देखने को मिलेगी।’
नोमुरा के विश्लेषकों को उम्मीद है कि पिछले साल के निम्न आधार के कारण लोढ़ा डेवलपर्स, डीएलएफ और ओबेरॉय रियल्टी प्री-सेल्स में वृद्धि कर सकती हैं। दूसरी तरफ उनको पिछले साल के अधिक आधार के कारण गोदरेज प्रॉपर्टीज और प्रेस्टीज एस्टेट्स प्रोजेक्ट्स में गिरावट की संभावना लग रही है। एनारॉक ग्रुप के उपाध्यक्ष संतोष कुमार के अनुसार तिमाही आधार पर पिछली तिमाही की तुलना में वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में लगभग 6 से 8 प्रतिशत की गिरावट हो सकती है क्योंकि पिछली तिमाही में अधिक आधार का प्रभाव था और मकान खरीदार हिचकिचा रहे थे।
अलबत्ता विश्लेषकों का कहना है कि प्रीमियम मकान और ब्रांडेड डेवलपरों की दमदार बुनियादी मांग के बीच प्रमुख डेवलपरों की समूची प्री-सेल्स जोरदार बनी हुई है।
डीएलएफ की प्री-सेल्स काफी हद तक गुरुग्राम में अपनी अल्ट्रा-लक्जरी परियोजना डहलियास के नए चरण की लॉन्चिंग से आएगी। लोढ़ा ने तिमाही के दौरान तीन परियोजनाएं लॉन्च कीं। इनमें दो मुंबई में और एक पुणे में थीं। ओबेरॉय का प्रदर्शन जोरदार बिक्री और बोरीवली में स्काई सिटी टॉवर एच के आंशिक स्टॉक की लॉन्चिंग और गोरेगांव में एलीसियन टावर्स में कुछ ऊपरी मंजिलों के स्टॉक के बल पर होगा।