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विदेशी सुस्ती के बीच घरेलू पूंजी का दम, Q1 में रियल एस्टेट निवेश 2022 के बाद सबसे ज्यादा

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पहली तिमाही में संस्थागत निवेश सालाना आधार पर 74 फीसदी बढ़कर 1.4 अरब डॉलर पहुंचा, हालांकि तिमाही आधार पर 62 फीसदी घटा

Last Updated- April 01, 2026 | 5:58 PM IST
Real Estate

भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और वैश्विक आर्थिक दबावों के बावजूद भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है। 2026 की पहली तिमाही में इस क्षेत्र में 1.4 अरब डॉलर का संस्थागत निवेश दर्ज किया गया, जो 2022 के बाद किसी भी पहली तिमाही का सबसे ऊंचा स्तर है। हालांकि पिछली तिमाही में असाधारण रूप से ऊंचे निवेश के कारण तिमाही आधार पर 62% की गिरावट दिखी। लेकिन सालाना आधार पर निवेश में 74% की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई।

वाणिज्यिक संपत्तियों में तेज उछाल

वेस्टियन रिसर्च के अनुसार पहली तिमाही में निवेश का रुख साफ तौर पर वाणिज्यिक संपत्तियों की ओर रहा। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) से बढ़ती मांग के कारण कुल निवेश में वाणिज्यिक परिसंपत्तियों की हिस्सेदारी 80% तक पहुंच गई, जो एक साल पहले 38% थी। मूल्य के लिहाज से इस खंड में 1.1 अरब डॉलर से अधिक का निवेश हुआ, जो सालाना आधार पर 266% की बढ़त है। हालांकि तिमाही तुलना में इसमें 51% की कमी आई है।

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आवासीय क्षेत्र में निवेश घटा, हिस्सेदारी हल्की बढ़ी

वाणिज्यिक संपत्तियों के इसके उलट आवासीय परिसंपत्तियों में निवेश घटकर 20.6 करोड़ डॉलर (0.2 अरब डॉलर) रह गया। यह तिमाही आधार पर 53% और सालाना आधार पर 59% की गिरावट दर्शाता है। दिलचस्प बात यह है कि गिरावट के बावजूद कुल निवेश में आवासीय हिस्सेदारी 12% से बढ़कर 15% हो गई।

इंडस्ट्रियल व वेयरहाउसिंग में भी सुस्ती

2026 की पहली तिमाही के दौरान इंडस्ट्रियल और वेयरहाउसिंग क्षेत्र में निवेशकों की रुचि काफी कमजोर रही। इस खंड में महज 2.18 करोड़ डॉलर का निवेश हुआ और इसकी हिस्सेदारी 17% से घटकर 1% रह गई। विविधीकृत परिसंपत्तियों में भी निवेश में तेज गिरावट दर्ज हुई।

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विदेशी निवेश घटा, घरेलू निवेश बना सहारा

भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक दबावों के कारण विदेशी निवेश की हिस्सेदारी एक साल पहले के 40% से अधिक से घटकर 2026 की पहली तिमाही में 13% रह गई। सह-निवेश (को-इन्वेस्टमेंट) की हिस्सेदारी भी पिछली तिमाही के 37% से घटकर 15% रह गई। इसके विपरीत घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी 2025 की चौथी तिमाही के 22% से बढ़कर 2026 की पहली तिमाही में 72% हो गई। मूल्य के आधार पर 1 अरब डॉलर से अधिक का घरेलू निवेश आया, जो सालाना आधार पर 118% और तिमाही आधार पर 25% अधिक है।

वेस्टियन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीनिवास राव ने कहा कि विदेशी भागीदारी में कमी के बावजूद घरेलू पूंजी बाजार की रफ्तार बनी हुई है। जीसीसी की मांग वाणिज्यिक परिसंपत्तियों में निवेश को सहारा दे रही है। जिससे भारत दीर्घकालिक निवेश गंतव्य के रूप में और मजबूत हो रहा है।

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First Published - April 1, 2026 | 5:58 PM IST

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