रीपो दर को 5.25 प्रतिशत पर ही बनाए रखने के फैसले का रियल एस्टेट डेवलपरों और कंसल्टेंट फर्मों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि मौद्रिक नीति में स्थिरता से आवासीय मांग बनी रहेगी और परियोजनाएं पूरी करने में मदद मिलेगी। हालांकि बढ़ती लागत, भूराजनीतिक तनाव और महंगाई की चुनौतियां पैदा हो रही हैं।
उद्योग के अधिकारियों ने कहा है कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) का फैसला घर खरीदारों और डेवलपरों को ऐसे समय में भरोसा देता है जब वैश्विक अनिश्चितताओं का असर कच्चे माल की लागत और निवेशक धारणा पर पड़ रहा है।
टाटा रियल्टी ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी संजय दत्त ने कहा, ‘उधार लेने की स्थिर लागत से आवासीय मांग को समर्थन मिलता रहेगा, खासकर उन प्रमुख शहरी इलाकों में, जहां घर खरीदने की चाहत अभी भी मजबूत है।’
एनारॉक ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा, ‘दरों में कोई बदलाव न करने का आरबीआई का फैसला आवासीय रियल एस्टेट बाजार के लिए अहम आधार है। ऋण लेने की लागत स्थिर रहने से यह सुनिश्चित होता है कि बाजार पर एक ही समय में सामग्री की ज्यादा लागत और ऋण की बढ़ती दरों का बोझ न पड़े।’
पुरी ने कहा कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संघर्ष की वजह से दुनिया भर में तेल की कीमतें और निर्माण की लागत बढ़ गई है। साथ ही कुछ विदेशी निवेशकों ने भारत में आवासीय निवेश को फिलहाल टालने का फैसला किया है।
भारत के बड़े डेवलपरों ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही की अपनी आय संबंधित टिपप्णियों में पहले ही संकेत दे दिया है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण निर्माण की लागत में 2-5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका मार्जिन पर सीमित असर होगा जिसका प्रबंध हो सकता है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब घरों की आपूर्ति बिक्री से ज्यादा है। एनारॉक के आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2026 में बिक्री सालाना आधार पर 4.43 प्रतिशत घटकर 4,04,005 मकान रह गई, जबकि नई आपूर्ति लगभग 11 फीसदी बढ़कर 4,45,405 मकान हो गई। उपलब्ध घरों की संख्या भी सालाना आधार पर 7.4 प्रतिशत बढ़ी और 6,01,210 आवास हो गई।
उद्योग के जानकारों का कहना है कि घरों की बढ़ती संख्या कम करने के लिए वित्त सुविधा का स्थिर माहौल बहुत जरूरी है। जेएलएल इंडिया की वरिष्ठ प्रबंध निदेशक और कैपिटल मार्केट की प्रमुख लता पिल्लई ने कहा कि केंद्रीय बैंक ने वृद्धि से जुड़ी चिंताओं और ऊर्जा की ऊंची कीमतों व कमजोर मॉनसून की आशंका से पैदा हो रहे महंगाई के जोखिमों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है।
पिल्लई ने कहा, ‘हालांकि महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है, लेकिन महंगाई दर तय दायरे में ही बनी हुई है। ब्याज दरों में कोई बदलाव न होना रियल एस्टेट बाजार के लिए अच्छी बात है। डेवलपर और घर खरीदने वालों के लिए ऋण की
दरों को लेकर निश्चितता से सभी संबंधित पक्षों पर कोई खास असर नहीं पड़ने की उम्मीद है।’