Warehousing demand 2026-Q1: भारत के वेयरहाउसिंग व लॉजिस्टिक्स सेक्टर ने 2025 में नरमी के दौर के बाद इस साल अच्छी शुरुआत की है। यह सेक्टर 2026 में मजबूत स्थिति के साथ प्रवेश कर चुका है। बेहतर ऑक्युपायर सेंटिमेंट, घरेलू मांग की मजबूती और अवसंरचना में लगातार सुधार के चलते क्षेत्र में नई ऊर्जा दिखाई दे रही है। 2025 में सावधानीपूर्ण विस्तार रणनीतियों और नेटवर्क ऑप्टिमाइजेशन के बाद अब कंपनियां धीरे-धीरे विस्तार की ओर लौट रही हैं और प्रमुख लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर में उच्च मांग वाले ग्रेड-ए परिसंपत्तियों में चयनात्मक क्षमता बढ़ा रही हैं।
वेस्टियन रिसर्च के मुताबिक भारत के शीर्ष सात शहरों में 2026 की पहली तिमाही (Q1) में वेयरहाउसिंग व लॉजिस्टिक्स सेक्टर में 114 लाख वर्ग फुट मांग दर्ज की गई, जो तिमाही आधार पर 8% की वृद्धि और लगातार चौथी तिमाही की क्रमिक बढ़त को दर्शाती है। हालांकि सालाना आधार पर मांग में 14% की गिरावट रही, फिर भी लीजिंग गतिविधि मजबूत बनी रही, जिसमें 3PL, इंजीनियरिंग एवं मैन्युफैक्चरिंग और उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र के ऑक्युपायर प्रमुख रहे। मुंबई और पुणे ने मिलकर कुल लीजिंग गतिविधि में 81% योगदान दिया, जो पश्चिमी भारत के स्थापित औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब की मांग में निरंतर बढ़त को रेखांकित करता है। यह सतत तिमाही सुधार संकेत देता है कि 2025 की नरमी संरचनात्मक मंदी नहीं बल्कि रणनीतिक पुनर्संतुलन का चरण था।
वेस्टियन के सीईओ श्रीनिवास राव ने कहा, ‘वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र ने 2026 की शुरुआत नई गति के साथ की है क्योंकि 2025 में सुस्त अवधि के बाद ऑक्युपायर फिर से विस्तार योजनाओं पर लौट रहे हैं। मांग में क्रमिक वृद्धि बाजार की मजबूत बुनियाद को दर्शाती है, जिसे बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि, अवसंरचना विकास और घरेलू खपत का समर्थन मिल रहा है। पिछले वर्ष के उच्च आधार के कारण वार्षिक तुलना प्रभावित दिखती है। लेकिन आने वाली तिमाहियों में यह क्षेत्र सतत वृद्धि के लिए अच्छी स्थिति में है।’
मुंबई में Q1 2026 के दौरान 47.6 लाख वर्ग फुट सर्वाधिक मांग दर्ज की गई, जो देशव्यापी मांग का 42% है।
पुणे 44.6 लाख वर्ग फुट के साथ दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा और यहां तिमाही आधार पर 162% और सालाना आधार पर 42% की वृद्धि, जो पिछले कुछ समय की सुस्ती के बाद तेज सुधार का संकेत है।
हैदराबाद में 6.9 लाख वर्ग फुट मांग रही, जो पिछली तिमाही से 17% कम लेकिन सालाना आधार पर 50% अधिक है।
एनसीआर में 7.3 लाख वर्ग फुट मांग दर्ज की गई, जो तिमाही आधार पर 61% और सालाना आधार पर 57% की तेज गिरावट दर्शाती है।
चेन्नई में 5.9 लाख वर्ग फुट मांग देखी गई, जो पिछली तिमाही से 50% और सालाना आधार पर 34% कम है।
बेंगलूरु में तिमाही आधार पर 566% की तेज वृद्धि के बावजूद सालाना आधार पर 87% की गिरावट के साथ 1.7 लाख वर्ग फुट मांग देखने को मिली।
कोलकाता में लीजिंग गतिविधि बेहद कम रही और मांग घटकर 0.10 लाख वर्ग फुट पर आ गई।
वेस्टियन के मुताबिक सप्लाई चेन की मजबूती, आधुनिक ग्रेड-ए सुविधाओं की बढ़ती मांग और उभरते टियर-1 व टियर-2 लॉजिस्टिक्स हब में विस्तार 2026 में वृद्धि के अगले चरण को गति देंगे। ऑक्युपायर नेटवर्क दक्षता, तेज डिलीवरी क्षमता और तकनीक-सक्षम वेयरहाउसिंग समाधानों को प्राथमिकता देंगे, जिससे रणनीतिक कॉरिडोर में नई मांग पैदा होगी। वर्ष 2026 के अंत तक वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में वार्षिक मांग 4.5 करोड़ वर्ग फुट से अधिक रहने की उम्मीद है, जो क्षेत्र में स्थायी मांग को दर्शाती है।