रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और एस्सार समूह दो दौर की बोली में पेश किए गए 16 कोल बेड मीथेन (सीबीएम) ब्लॉक के लिए अग्रणी बोलीदाताओं के रूप में उभरे हैं। हाइड्रोकार्बन्स महानिदेशालय (डीजीएच) की बोलीदाताओं की सूची से यह जानकारी मिली। सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल इंडिया लिमिटेड ने तीन ब्लॉक के लिए बोली लगाई जबकि भारत की सबसे बड़ी तेल और गैस उत्पादक कंपनी ओएनजीसी ने बोली में हिस्सा नहीं लिया।
सरकार ने विशेष सीबीएम बोली दौर 2025 में भूमिगत कोयले की परतों में फंसी प्राकृतिक गैस की खोज और उत्पादन के लिए तीन क्षेत्रों की पेशकश की थी। इसके साथ 2026 के बोली दौर में 13 अन्य ब्लॉक की पेशकश की गई। दोनों दौर की बोली 5 मार्च को बंद हुई। कोल बेड मीथेन (सीबीएम) एक प्रकार की गैर-परंपरागत प्राकृतिक गैस (मुख्यतः मीथेन) है, जो भूमिगत कोयले की परतों में फंसी होती है। इससे उत्पादित गैस का उपयोग बिजली उत्पादन, हीटिंग और औद्योगिक उपयोग के लिए स्वच्छ ईंधन के रूप में किया जाता है। इसे वाहन चलाने के लिए सीएनजी में भी परिवर्तित किया जा सकता है और खाना पकाने के लिए घरों की रसोई में पाइपलाइन के माध्यम से पहुंचाया जा सकता है। जलने पर यह आम तौर पर कोयले की तुलना में कम कार्बन उत्सर्जन करती है।
विशेष सीबीएम बोली दौर में 2025 और 2026 में पेश किए गए ब्लॉक श्रेणी दो और तीन बेसिन आते हैं। रिलायंस ने 2026 के विशेष सीबीएम बोली दौर में पेश किए गए 13 ब्लॉक में से तीन के लिए बोली लगाई, जबकि एस्सार ऑयल ऐंड गैस एक्सप्लोरेशन ऐंड प्रोडक्शन लि. (ईओजीईपीएल) ने 2026 के दौर के तीन ब्लॉक और 2025 के दौर में पेश किए गए तीन ब्लॉक में से दो के लिए बोली लगाई।