तेल से लेकर रिटेल कारोबार तक में दखल रखने वाले कारोबारी समूह रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) ने पश्चिम एशिया में संघर्ष से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों के बारे में आगाह किया है। उसने कहा कि वित्त वर्ष 2027 के लिए दृष्टिकोण ‘भू-राजनीतिक, वृहद आर्थिक और नीतिगत जोखिमों के प्रति अत्यंत संवेदनशील’ बना हुआ है।
वित्त वर्ष 2026 में सरकारी खजाने में 2.16 लाख करोड़ रुपये का योगदान देने वाला रिलायंस समूह ने गुरुवार को जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि तेल की ऊंची कीमतों और आर्थिक मंदी के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की मांग में वृद्धि सुस्त रहने की आशंका है।
आरआईएल ने कहा, ‘पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच वित्त वर्ष 2026-27 में तेल की ऊंची कीमतों और आर्थिक मंदी के कारण वैश्विक तेल की मांग में वृद्धि धीमी रहने की उम्मीद है। रिफाइनरी और तेल अवसंरचना को हुए नुकसान से आपूर्ति प्रभावित हुई है और बुनियादी ढांचे के ठीक होने में समय लगेगा जिससे बाजार में लगातार अस्थिरता बनी रहेगी।’
समूह ने आगाह किया कि वित्त वर्ष 2026-27 का दृष्टिकोण भू-राजनीतिक, व्यापक आर्थिक और नीतिगत जोखिमों के प्रति अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है।
आरआईएल ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि पश्चिम एशिया से आपूर्ति में व्यवधान, कीमतों में उठापटक, विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क पर केंद्र सरकार के निर्देश और प्रमुख पेट्रोरसायन उत्पादों पर शुल्क छूट चालू वित्त वर्ष के दौरान घरेलू तेल और गैस की मांग तथा कंपनी के मार्जिन पर दबाव डाल सकते हैं।
वित्त वर्ष 2026 के दौरान मांग की गति पहली 3 तिमाहियों में मजबूत बनी रही लेकिन मार्च 2026 में ईरान संघर्ष के कारण इसमें भारी व्यवधान आया। आरआईएल के अनुसार वैश्विक तेल बाजार पर पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन और उसके सहयोगियों (ओपेक+) से बढ़ती आपूर्ति, ईरान और रूस पर बढ़ते प्रतिबंधों, व्यापार शुल्क का दबाव और पश्चिम एशिया संघर्ष का असर पड़ा है। इससे मांग वृद्धि की गति सुस्त हुई और कीमतों में अस्थिरता बढ़ी है।
इस बीच आरआईएल ने कहा कि भारत की पेट्रोलियम मांग लगातार बढ़ रही है और वित्त वर्ष 2026 में खपत 1.7 फीसदी बढ़कर 24.3 करोड़ टन सालाना हो गई।
आरआईएल ने भारत के ऊर्जा परिवर्तन में प्राकृतिक गैस की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर भी जोर दिया और अनुमान लगाया कि 2030 तक ऊर्जा में इसकी हिस्सेदारी लगभग 6 फीसदी से बढ़कर 15 फीसदी हो जाएगी।
अपनी वार्षिक रिपोर्ट में शेयरधारकों को संबोधित करते हुए आरआईएल के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने कहा कि समूह अपने डिजिटल कारोबार को मजबूत करने के लिए सोच-समझकर कदम उठा रहा है। लेकिन इस साल जुलाई तक अपेक्षित जियो प्लेटफॉर्म्स लिस्टिंग के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।
ब्रोकरेज फर्मों के अनुसार जियो प्लेटफॉर्म्स के अब तक की सबसे बड़ी सार्वजनिक लिस्टिंग होने का अनुमान है और इसका मूल्यांकन 135-145 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। जियो के वैश्विक निवेशकों में मेटा प्लेटफॉर्म्स, गूगल, सऊदी अरब का पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड और मुबाडला इन्वेस्टमेंट कंपनी शामिल हैं, जिन्होंने 2020 में हिस्सेदारी खरीदी थी।
अंबानी ने कहा, ‘हम हितधारकों की भागीदारी बढ़ाने और जियो के दीर्घकालिक विकास में सहयोग देने वाले रणनीतिक रास्तों का मूल्यांकन करना जारी रखेंगे।’ लेकिन उन्होंने आईपीओ की समयसीमा पर कोई टिप्पणी नहीं की।
जियो प्लेटफॉर्म्स रिलायंस जियो इन्फोकॉम की मूल कंपनी है और यह 52.4 करोड़ से अधिक ग्राहकों के साथ देश की सबसे बड़ी दूरसंचार सेवा प्रदाता है। जियो ने भारत में 5जी और एफडब्ल्यूए स्टैक का बड़े पैमाने पर विकास किया है।
खुदरा क्षेत्र पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कहा कि निकट अवधि की मांग व्यापक आर्थिक स्थितियों के प्रति संवेदनशील रह सकती है लेकिन रिटेल क्षेत्र के लिए मध्यम अवधि इसके सकारात्मक रहने की उम्मीद है।
कंपनी ने अपने परिदृश्य में कहा, ‘रिलायंस रिटेल को उम्मीद है कि वह विस्तार, परिचालन दक्षता और ग्राहक-केंद्रित नवाचार पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखेगी, साथ ही विवेकपूर्ण निवेश और अनुशासित जोखिम प्रबंधन के साथ स्टोर और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपने एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेगी।’ रिलायंस इंडस्ट्रीज की सहायक कंपनी रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (आरसीपीएल) एफएमसीजी कारोबार के लिए 2030 तक आय में कई गुना वृद्धि हासिल करने पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखेगी और उसकी आकांक्षा अग्रणी वैश्विक ब्रांडेड उपभोक्ता उत्पाद कंपनियों में से एक बनने की है। इसके पेय ब्रांड कैम्पा ने वित्त वर्ष 2025-26 में 4,700 करोड़ रुपये से अधिक की सकल बिक्री हासिल की।
कंपनी ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि मार्च 2026 में यह भारत का चौथा सबसे बड़ा कार्बोनेटेड शीतल पेय ब्रांड बन गया और प्रमुख बाजारों में दो अंक में बाजार हिस्सेदारी हासिल की।
अपनी विलय और अधिग्रहण रणनीतियों के बारे में कंपनी ने कहा, ‘आरसीपीएल लक्षित रणनीतिक साझेदारी और अधिग्रहणों के साथ-साथ मौजूदा कारोबार का विस्तार करने पर ध्यान देगी।वैश्विक विस्तार कंपनी के लिए एक रणनीतिक प्राथमिकता बनी हुई है।’