रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने गुरुवार को एक बयान जारी कर उन खबरों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि कंपनी ने ईरान से कच्चा तेल खरीदा है। रिलायंस ने इन रिपोर्टों को “बेबुनियाद” बताया।
बयान में कहा गया, “रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड हालिया मीडिया रिपोर्टों को पूरी तरह खारिज करता है, जिनमें दावा किया गया है कि कंपनी ने ईरानी मूल का कच्चा तेल खरीदा है। ये रिपोर्टें निराधार हैं और भ्रामक तथा गलत दावे पेश करती हैं।”
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब कच्चे तेल के फ्लो पर निगरानी बढ़ गई है। हाल ही में अमेरिका की प्रतिबंध नीति में कुछ बदलाव हुए हैं। वॉशिंगटन ने कुछ शर्तों और तय समय सीमा के तहत, पहले से ट्रांजिट में मौजूद ईरानी तेल से जुड़े सीमित लेन-देन की अस्थायी अनुमति दी है।
इस सप्ताह की शुरुआत में समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि गुजरात के जामनगर में दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स को चलाने वाली रिलायंस ने नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी से 50 लाख बैरल से ज्यादा ईरानी कच्चा तेल खरीदा है। हालांकि डिलीवरी की समय-सीमा स्पष्ट नहीं थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि इस कच्चे तेल की कीमत ग्लोबल बेंचमार्क से ज्यादा (प्रीमियम) पर तय की गई थी।
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2019 से ईरान का तेल व्यापार काफी सीमित हो गया है। उसी साल अमेरिका ने तेहरान पर दोबारा प्रतिबंध लगाए थे, जिसके बाद भारत ने ईरान से तेल आयात बंद कर दिया। तब से ईरानी कच्चा तेल ज्यादातर चीन की रिफाइनरियों तक जाता है, वह भी अक्सर अप्रत्यक्ष तरीकों से।
पिछले सप्ताह डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन ने एक राहत दी। इसके तहत समुद्र में पहले से मौजूद ईरानी तेल की खरीद पर 30 दिनों की छूट दी गई है। यह छूट उन कार्गो पर लागू है, जो 20 मार्च तक लोड किए गए थे, भले ही वे प्रतिबंधित जहाजों पर हों। लेकिन इन कार्गो को 19 अप्रैल तक उतारना जरूरी है।
इस मामले से इतर, गुरुवार को ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में कहा गया कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने कई वर्षों के बाद पहली बार ईरान से लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की खरीद की है, क्योंकि देश पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच आपूर्ति दबाव को संभालने की कोशिश कर रहा है।
इस बीच, भारतीय रिफाइनरियों ने हाल के हफ्तों में रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है, क्योंकि आपूर्ति संबंधी चिंताओं को देखते हुए प्रतिबंधों में ढील दी गई है।