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RPG लाइफ साइंसेज का बड़ा कदम: तेजी से बढ़ते GLP-1 मार्केट में एंट्री की तैयारी में कंपनी

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नए प्रबंध निदेशक के नेतृत्व में आरपीजी समूह की यह कारोबारी इकाई घरेलू ब्रांडेड दवाओं पर भी विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है

Last Updated- December 12, 2025 | 10:41 PM IST
RPG Life Sciences
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

आरपीजी लाइफ साइंसेज भारत के तेजी से उभरते जीएलपी-1 मधुमेह और मोटापारोधी दवा बाजार में प्रवेश करने की योजना बना रही है। इसके साथ कंपनी अधिग्रहण आधारित मध्यम अवधि की योजनाओं के तहत अमेरिकी बाजार पर भी नजर रखी हुई है, क्योंकि इसका लक्ष्य 2030 तक लगभग 2500 करोड़ रुपये का कारोबार हासिल करना है।

नए प्रबंध निदेशक के नेतृत्व में आरपीजी समूह की यह कारोबारी इकाई घरेलू ब्रांडेड दवाओं पर भी विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है। इसके अलावा, अधिग्रहण के माध्यम से सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री (एपीआई) क्षेत्र में अपनी क्षमता का निर्माण कर रही है।

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आरपीजी लाइफ साइंसेज के एमडी अशोक नायर ने कहा, ‘हमने पांच स्तंभों पर आधारित एक रणनीतिक दृष्टिकोण बनाया है, जिसके मूल में बड़े, विस्तार योग्य ब्रांड बनाना है।’ ऐबट, सिप्ला और टॉरेंट फार्मा में काम कर चुके फार्मा उद्योग के अनुभवी नायर भीड़भाड़ वाले जन-बाजार उपचारों से हटकर सुपर-स्पेशलिटी सेगमेंट पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।  जहां नैदानिक गहराई, जटिल प्रिस्क्रिप्शन व्यवहार और लंबे उपचार चक्र टिकाऊ ब्रांडिंग का समर्थन करते हैं। नायर ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘प्रवर्तकों का नजरिया स्पष्ट है। वे आरपीजी लाइफ साइंसेज को समूह की प्रमुख कंपनी बनान चाहते हैं।’ उल्लेखनीय है कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 में लगभग 582.1 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया, जो एक साल पहले की तुलना में 13.5 फीसदी अधिक है। वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में, आरपीजी लाइफ साइंसेज का परिचालन राजस्व लगभग 181.7 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 5.5 फीसदी ज्यादा अधिक है।

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नेफ्रोलॉजी कंपनी का सबसे मजबूत स्तंभ बना हुआ है, जिसे मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (एमएबी) के बढ़ते पोर्टफोलियो से बल मिल रहा है। यही मॉडल, जो नेफ्रोलॉजी में कारगर साबित हुआ है अब रुमेटोलॉजी में भी अपनाया जा रहा है और क्लिनिकल डर्मेटोलॉजी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी खासकर प्रत्यारोपण से संबंधित उपचारों में विस्तारित किया जा रहा है। कार्डियोलॉजी में ध्यान विशेष रूप से ऐरिथमियस और टैकीकार्डिया जैसे विशिष्ट क्षेत्रों पर केंद्रित है, न कि बड़े पैमाने पर उच्च रक्तचाप या कोलेस्ट्रॉल के उपचारों पर।

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First Published - December 12, 2025 | 10:32 PM IST

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