भारत सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के जरिये घरेलू पोत परिवहन को बढ़ावा देकर समुद्री क्षेत्र में बड़ी पहल करने की योजना बना रहा है। इसी वजह से पोत परिवहन मंत्रालय कंपनी के विनिवेश के लिए 2019 में मंत्रिमंडल से मिली मंजूरी को वापस लेने पर बातचीत कर रहा है। घटनाक्रम से अवगत लोगों ने इसकी जानकारी दी। नवंबर 2019 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया समेत कई सरकारी कंपनियों के विनिवेश की योजनाओं को मंजूरी दी थी।
वर्ष 2021 में शिपिंग कॉरपोरेशन की गैर-मुख्य संपत्तियों को अलग कर एससीआई लैंड ऐसेट्स लिमिटेड बनाई गई ताकि कंपनी के विनिवेश की प्रक्रिया कुशलता और तेजी से पूरी की जा सके, साथ ही कारोबार और परिसंपत्तियों के मूल्य का भी पता लगाया जा सके। शिपिंग कॉरपोरेशन की गैर-मुख्य संपत्तियों में कंपनी के मुख्यालय की इमारत ‘शिपिंग हाउस’ और मुंबई में एक मैरीटाइम ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट शामिल हैं।
मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 2019 में मंत्रिमंडल से विनिवेश के लिए मिली मंजूरी को वापस लेने का विचार उस समय आया, जब इस साल की शुरुआत में पोत परिवहन मंत्रालय ने मंत्रिमंडल के पास जाने से पहले अंतर मंत्रालयी परामर्श के जरिये शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और एससीआई लैंड ऐसेट्स लिमिटेड के विलय का प्रस्ताव रखा था। उस समय मंत्रालय ने अपने प्रस्ताव में दोनों कंपनियों का विलय करने और पांच साल के लिए लाभांश में छूट की मांग की थी। इससे शिपिंग कॉरपोरेशन को एससीआई लैंड ऐसेट्स के लगभग 1,000 करोड़ रुपये की नकदी के साथ ही लाभांश देने से छूट मिलने पर करीब 2,500 करोड़ रुपये मिल सकते हैं।
मंत्रालयों के बीच बातचीत के दौरान निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) ने विलय का विरोध किया, उसके बाद विनिवेश की मंजूरी वापस लेने का नया प्रस्ताव किया गया। दीपम का तर्क था कि कारोबार अलग करने की प्रक्रिया मूल रूप से शिपिंग कॉरपोरेशन के विनिवेश को संभव बनाने के लिए किया गया था। विनिवेश को पूरा करने की जिम्मेदारी दीपम विभाग की है। दीपम ने नवंबर 2019 में मिली कैबिनेट की मंजूरी का भी उल्लेख किया।
इस बारे में जानकारी के लिए वित्त मंत्रालय तथा पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंंत्रालय को मंगलवार को हमने ईमेल भेजे मगर खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं आया।
बुधवार को नैशनल स्टॉक एक्सचेंज पर शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया का बाजार पूंजीकरण लगभग 13,378 करोड़ रुपये था और मौजूदा मूल्यांकन के हिसाब से कंपनी के विनिवेश से सरकार को करीब 8,428 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। इस क्षेत्र पर नजर रखने वालों के मुताबिक सरकार वैश्विक मैरीटाइम परिचालन में बड़ी हिस्सेदारी के लिए जोर दे रही है और शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया इसमें अहम भूमिका निभा सकती है।
पिछले साल अक्टूबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2.2 लाख करोड़ रुपये की मैरीटाइम योजनाओं का ऐलान किया था जिसमें शिपिंग कॉरपोरेशन के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की योजना भी शामिल थी ताकि 2047 तक इसके बेड़े में जहाजों की संख्या बढ़ाकर 216 की जा सके।
शिपिंग कॉरपोरेशन सरकार की दो प्रस्तावित शिपिंग उद्यमों का भी नेतृत्व करेगी। इन दो उद्यमों में शिपिंग कॉरपोरेशन को इक्विटी साझेदार के तौर पर निवेश करना होगा। इन दो उद्यमों में पहला भारत कंटेनर शिपिंग लाइन है, जो देश का राष्ट्रीय कंटेनर कैरियर बनेगा और दूसरा है तेल मार्केटिंग कंपनियों के साथ मिलकर कच्चे तेल के टैंकरों में संयुक्त हिस्सेदारी वाला उद्यम।
इन दो उद्यमों में शेयरधारकों को लगभग 12,000 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा। इसमें से लगभग 5,000 करोड़ से 6,000 करोड़ रुपये शिपिंग कॉरपोरेशन से इक्विटी के तौर पर मिलने की उम्मीद है। लंबे समय में भारत कंटेनर शिपिंग लाइन का पूंजीगत व्यय लगभग 60,000 करोड़ रुपये होगा और यह वैश्विक मैरीटाइम कार्गो की आवाजाही में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के सरकार के लक्ष्य में सहायता करेगा।
भारत पोत निर्माण में अग्रणी बनना चाहता है और हाल ही में इसने तमिलनाडु में शिपयार्ड बनाने के लिए एचडी कोरिया शिपबिल्डिंग ऐंड ऑफशोर इंजीनियरिंग के साथ करार किया है। सरकार को उम्मीद है कि नए उद्यम से भारत में बने जहाजों की मांग बढ़ेगी जिससे जहाज निर्माण के शुरुआती पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर निवेश चक्र में बदलने में मदद मिलेगी। शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने जहाजों के लिए निविदा जारी करना शुरू कर दिया है।