Specialty Chemicals Stocks: मार्च तिमाही (Q4FY26) के नतीजों से पहले केमिकल सेक्टर को लेकर तस्वीर दिलचस्प नजर आ रही है। ब्रोकरेज रिपोर्ट के मुताबिक, सेक्टर की कंपनियों की आय में करीब 6 प्रतिशत सालाना बढ़त का अनुमान है, जबकि तिमाही आधार पर प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद है। यानी पिछली तिमाही के मुकाबले राहत दिख सकती है, लेकिन हर कंपनी एक जैसा प्रदर्शन नहीं करेगी।
जनवरी से मार्च के दौरान भारतीय केमिकल कंपनियों के निर्यात में सुधार देखा गया है। इसकी मुख्य वजह कई प्रोडक्ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी रही है। पश्चिम एशिया में तनाव और चीन द्वारा कुछ वैल्यू चेन में VAT रिबेट कम करने से कीमतों में उछाल आया, जिसका फायदा भारतीय कंपनियों को मिला। इससे निर्यात मांग में मजबूती देखने को मिली।
इस तिमाही में इनऑर्गेनिक केमिकल्स सेगमेंट खास तौर पर मजबूत नजर आ रहा है। कास्टिक सोडा और ब्रोमीन जैसे प्रोडक्ट्स के दाम में अच्छी बढ़त देखी गई है। खास बात यह है कि इन प्रोडक्ट्स के लिए कच्चे माल की कोई बड़ी कमी नहीं रही, जिससे कंपनियों को उत्पादन और सप्लाई में दिक्कत नहीं आई।
रेफ्रिजरेंट गैस से जुड़े कारोबार में भी मजबूती बनी रही। चीन में मजबूत प्राइसिंग के चलते घरेलू बाजार में भी ऊंचे दाम बने रहे। इसके साथ ही इस सेगमेंट में वॉल्यूम ग्रोथ भी मजबूत रही, जो कंपनियों के नतीजों को सहारा दे सकती है।
हालांकि, सेक्टर के सामने सबसे बड़ी चुनौती कच्चे माल की उपलब्धता बनी हुई है। इसका असर खासकर अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1FY27) में देखने को मिल सकता है। फिलहाल Q4 में पहले से मौजूद इन्वेंटरी के कारण कंपनियों को कुछ राहत जरूर मिल रही है।
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ब्रोकरेज के मुताबिक, दीपक नाइट्राइट, अतुल और PI इंडस्ट्रीज इस तिमाही में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। इन कंपनियों को कीमतों में सुधार, निर्यात में रिकवरी और मजबूत मांग का फायदा मिलने की उम्मीद है। वहीं दूसरी ओर, नवीन फ्लोरिन, दीपक फर्टिलाइजर और GHCL जैसी कंपनियों के नतीजे कमजोर रह सकते हैं। इन पर मांग की कमजोरी और मार्जिन दबाव का असर दिख सकता है।
ब्रोकरेज ने बल्क केमिकल कंपनियों में दीपक नाइट्राइट, आरती इंडस्ट्रीज और अतुल को अपनी पसंद बताया है, जहां बेहतर ग्रोथ और स्थिर प्रदर्शन की उम्मीद जताई गई है।
कुल मिलाकर, केमिकल सेक्टर में इस बार एकतरफा कहानी नहीं दिखेगी। कुछ कंपनियां कीमतों और मांग के दम पर अच्छा प्रदर्शन कर सकती हैं, जबकि कई कंपनियां लागत और सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों से जूझती रहेंगी। ऐसे में निवेशकों के लिए यह जरूरी होगा कि वे पूरे सेक्टर के बजाय चुनिंदा कंपनियों पर ही फोकस करें।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)