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Startup Investment: सिंगापुर के जरिए निवेश पाने वाले स्टार्टअप्स को मिला नोटिस

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आयकर विभाग ने मांगा 5 साल का हिसाब-किताब, विदेशी निवेश के स्रोत और निवेशकों की जानकारी तलब

Last Updated- April 15, 2025 | 10:23 PM IST
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आयकर विभाग ने सिंगापुर के जरिये विदेशी रकम हासिल करने के मामले में कई स्टार्टअप को आयकर अधिनियम की धारा 68 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में विभाग ने पिछले पांच वर्षों के दौरान प्राप्त निवेश के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है। मामले से अवगत सूत्रों ने बताया कि विभाग ऐसे लेनदेन में विदेशी निवेशकों के स्रोत, पहचान और साख के बारे में पूछताछ कर रहा है। इसके अलावा सिंगापुर में बैंक खाता रखने वाले अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) को भी नोटिस भेजे जा रहे हैं।

मामले से अवगत एक व्यक्ति ने कहा, ‘यह कोई नियमित पूछताछ नहीं बल्कि औपचारिक तौर पर भेजा गया कारण बताओ नोटिस है। कंपनियों से कहा गया है कि वे अपने निवेशकों से संबंधित विस्तृत दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए पिछले कुछ वर्षों के दौरान जुटाई गई रकम को स्पष्ट करें।’

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 68 के तहत विभाग को करदाता के बहीखाते में अस्पष्ट लेनदेन पर सवाल उठाने का अधिकार दिया गया है। नोटिस जारी किए जाने के बाद कंपनियों को विदेशी निवेशक की पहचान, उनकी साख और लेनदेन की वास्तविकता सुनिश्चित करनी होगी।

एक सूत्र ने कहा, ‘स्टार्टअप के जवाब से संतुष्ट होने पर विभाग मामले को बंद कर देगा। मगर कई स्टार्टअप को ऐसे विस्तृत विवरण जुटाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, खास तौर पर विरासत वाले पुराने लेनदेन के मामले में।’ सूत्रों ने कहा, ‘खास तौर पर द्विपक्षीय कर संधि में शामिल दुरुपयोग विरोधी प्रावधान प्रिंसिपल पर्पस टेस्ट (पीपीटी) के तहत लेनदेन की जांच की जा रही है, ताकि यह पता चल सके कि सिंगापुर के जरिये भेजी गई रकम का प्राथमिक उद्देश्य कर संधि अवैध रूप से लाभ उठाना अथवा कर देनदारी से बचना तो नहीं था। वाणिज्यिक तौर पर अव्यवहारिक अथवा अधिक मूल्यांकन या कर देनदारी से बचने के लिए किए गए निवेश की जांच आयकर अधिनियम, फेमा (विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम) और भारत-सिंगापुर कर संधि के प्रावधानों के संदर्भ में की जा रही है।’

इस बाबत जानकारी के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) को भेजे गए ईमेल का खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं आया। एकेएम ग्लोबल के पार्टनर अमित माहेश्वरी ने कहा, ‘हालांकि धारा 68 काले धन को उजागर करने और कर चोरी के खिलाफ लड़ाई में एक महत्त्वपूर्ण हथियार है। मगर इसके अत्यधिक उपयोग से मुकदमेबाजी बढ़ सकती है।’ध्रुव एडवाइजर्स के पार्टनर पुनीत शाह के अनुसार, आयकर अधिनियम 1961 की धारा 68 का नियमित तौर पर उपयोग नहीं किया जा सकता है।

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First Published - April 15, 2025 | 10:23 PM IST

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