भारत में तेजी से बढ़ रहे सेमाग्लूटाइड के बाजार में जेनेरिक संस्करण के आने के दो महीने बाद ही इन्वेंट्री बढ़ने का संकेत दिखने लगा है। दवा कंपनियों ने मोटापे और मधुमेह के इलाज के लिए इस दवा की जबरदस्त मांग की उम्मीद में बड़े पैमाने पर स्टॉक जमा किया था। लेकिन फार्मारैक के आंकड़ों से पता चलता है कि हाल ही में बाजार में आए कई ब्रांडों का स्टॉक काफी ज्यादा है जबकि बिक्री उम्मीद से धीमी है।
यदि अगले एक से दो महीनों में बिक्री में सुधार नहीं होता है तो वितरक स्टॉक वापस करना शुरू कर सकते हैं। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि सेमाग्लूटाइड उत्पादों को कोल्ड-चेन स्टोरेज की आवश्यकता होती है और यह रेफ्रिजरेटर में जगह घेर रहे हैं जिसका उपयोग आम तौर पर टीके और इंसुलिन रखने के लिए किया जाता है।
मार्केट इंटेलिजेंस और विश्लेषण फर्म फार्मारैक के अनुसार मई में कई जेनेरिक सेमाग्लूटाइड ब्रांडों में 45 दिन से अधिक की इन्वेंट्री थी। यह इस साल की शुरुआत में पेटेंट समाप्त होने के बाद इन्वेंट्री के अधिक होने का संकेत देता है। उच्च स्टॉक वाले ब्रांड में डॉ. रेड्डीज की मैशलो का मई में 71 दिन का स्टॉक था जबकि ग्लेनमार्क के ग्लिपिक का 69 दिन और ओबेदा का 57 दिन का स्टॉक था। मैनकाइंड की सेमाग्लू की इन्वेंट्री 62 दिन की थी, ऐबट के एक्सटेंसियर में 51 दिन और जायडस की मैशेमा की 53 दिन और सेमाग्लिन की 46 दिन की इन्वेंट्री थी।
इसके उलट नोवो नॉर्डिस्क के इनोवेटर ब्रांड वीगोवी का 24 दिन, ओजेम्पिक का 27 दिन और राइबेल्सस का 22 दिन का स्टॉक था जो अपेक्षाकृत कम है। लगभग 200 करोड़ रुपये के सालाना बिक्री लक्ष्य के साथ सेमाग्लूटाइड बाजार में प्रवेश करने वाली कंपनियों ने संभवतः जेनरिक संस्करण लाने के बाद पहले छह महीनों के लिए पर्याप्त इन्वेंट्री उपलब्धता सुनिश्चित की होगी। हालांकि अधिकांश प्रमुख ब्रांडों की मासिक बिक्री 20 करोड़ रुपये के अनुमान से कम बनी हुई है।
फार्मारैक की उपाध्यक्ष (कमर्शियल) शीतल सपाले ने कहा, ‘वितरकों के पास स्टॉक का ढेर लगा है और उन्हें कोल्ड-चेन स्टोरेज के दबाव का भी सामना करना पड़ रहा है क्योंकि सेमाग्लूटाइड उत्पादों को रेफ्रिजरेशन की आवश्यकता होती है।’ मुंबई की एक फार्मा कंपनी के कार्याधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि कंपनियां आम तौर पर लॉन्च के बाद 4 से 6 महीने के लिए पर्याप्त इन्वेंट्री रखती हैं।
आशिका ग्रुप में शोध विश्लेषक निराली शाह ने कहा, ‘हो सकता है कि पिछले महीने कुछ इन्वेंट्री जमा हुई हो लेकिन इससे पूरे मार्केट की स्थिति का पता नहीं चलता। असल में मांग मजबूत बनी हुई है। आगे इसका इस्तेमाल बढ़ने की उम्मीद है।’