देश के विंड एनर्जी बाजार में 32-35 फीसदी के बीच हिस्सेदारी रखने वाली सुजलॉन एनर्जी अब फुल-स्टैक रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी बनने की तैयारी में है। कंपनी ने विंड एनर्जी के अलावा सोलर और बैटरी एनर्जी स्टोरेज जैसे सेगमेंट में भी बड़ी दमदार दखल देने की योजना बनाई है। हालांकि कंपनी ने कहा है कि विंड एनर्जी सेगमेंट मुख्य ग्रोथ इंजन बना रहेगा और वित्त वर्ष 2031 तक इसमें 40 फीसदी मार्केट शेयर हासिल करने का टारगेट है। अपने बिजनेस के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सुजलॉन ग्रुप ने अपनी नई ग्रोथ स्ट्रैटेजी ‘Suzlon 2.0’ का ऐलान किया है। इसमें वित्त वर्ष 2031 तक 10 गीगावाट (GW) सालाना रिन्यूएबल एनर्जी सेल्स और 70 GW एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) हासिल करने का प्लान है।
‘सुजलॉन 2.0’ में कंपनी ने कहा कि अब केवल विंड टरबाइन मैन्युफैक्चरर (Wind OEM) से आगे बढ़ते हुए खुद को “विंड-फर्स्ट फुल-स्टैक रिन्यूएबल एनर्जी सॉल्यूशंस कंपनी” के रूप में स्थापित कर रही है। कंपनी का लक्ष्य तेजी से बढ़ती एनर्जी डिमांड और एनर्जी ट्रांसमिशन के दौर में ग्राहकों को कंसॉलिडेट करने, भरोसेमंद और किफायती स्वच्छ ऊर्जा समाधान उपलब्ध कराना है। कंपनी ने ब्रांड की नई टैग लाइन “Good Energies That Work” भी लॉन्च की।
सुजलॉन ग्रुप के वाइस चेयरमैन गिरीश तांती का कहना है कि दुनिया तेजी से इलेक्ट्रिफिकेशन के एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। Suzlon 2.0 ग्राहकों और देशों को एनर्जी ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अगले पांच वर्षों में रिन्यूएबल क्षमता को चार गुना बढ़ाकर 70 GW और सालाना सेल्स को 10 GW तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।
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Suzlon 2.0 चार प्रमुख बिजनेस वर्टिकल्स पर आधारित होगा। इसमें विंड-फर्स्ट कम्प्लीट सॉल्यूशंस, RE DevCo, RE Projects और RE एसेट मैनेजमेंट सर्विसेज है। इन सभी बिजनेसेस को मिलाकर कंपनी एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करना चाहती है जो बड़े पैमाने पर रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं को तेजी, विश्वसनीयता और बेहतर प्रदर्शन के साथ लागू कर सके।
सुजलॉन एनर्जी का दावा है कि वह भारत की पहली ऐसी फुल-स्टैक रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी बन रही है, जो विंड एनर्जी, सोलर एनर्जी, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS), और एनर्जी मैनेजमेंट सर्विसेज को एक ही प्लेटफॉर्म के तहत उपलब्ध कराएगी। कंपनी का लक्ष्य ग्राहकों के लिए “वन-स्टॉप रिन्यूएबल एनर्जी पार्टनर” बनना है, जिससे प्रोजेक्ट्स के एग्जीक्यूशंस में होने वाली जटिलताओं को कम किया जा सके।
सुजलॉन ने हालांकि स्पष्ट किया है कि आने वाले वर्षों में भी विंड एनर्जी उसका सबसे बड़ा विकास इंजन बनी रहेगी। कंपनी FY31 तक भारतीय विंड मार्केट में 40% हिस्सेदारी बनाए रखना चाहती है। वहीं, निर्यात बाजारों से 3 GW ऑर्डर हासिल करना चाहती है। इसके लिए कंपनी अपने नए “BlueSky” प्लेटफॉर्म के तहत अगली पीढ़ी के हाई-कैपेसिटी विंड टरबाइन लॉन्च करेगी। इनमें S175 (5 मेगावाट) और S163 (6.3 मेगावाट) शामिल हैं। इसके अलावा कंपनी 2 MW से 6 MW से अधिक क्षमता वाले टरबाइनों का व्यापक पोर्टफोलियो पेश करेगी।
सुजलॉन ने अगले पांच वर्षों के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया है। कंपनी का लक्ष्य सालाना रिन्यूएबल एनर्जी सेल्स को चार गुना बढ़ाकर 10 GW तक पहुंचाना, ऑर्डर बुक को बढ़ाकर 15 GW करना, एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) को चार गुना बढ़ाकर 70 GW तक ले जाना, भारत के विंड एनर्जी मार्केट में करीब 40 फीसदी हिस्सेदारी बनाए रखना, निर्यात बाजारों से 3 GW ऑर्डर हासिल करना, और कुल कारोबार में RE DevCo का योगदान लगभग 60 फीसदी तक बढ़ाना है। कंपनी का मानना है कि इससे उसे एक मजबूत और नियमित आय वाला (Annuity-led) बिजनेस मॉडल तैयार करने में मदद मिलेगी।
सुजलॉन एनर्जी ने कहा कि रिन्यूएबल एनर्जी की सबसे बड़ी चुनौती इसकी अनियमित उपलब्धता होती है। इसी समस्या को हल करने के लिए सुजलॉन अब Battery Energy Storage Systems (BESS) के क्षेत्र में भी एंट्री कर रही है। कंपनी की योजना 2027 तक BESS मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने और भारतीय ग्रिड की जरूरतों के अनुसार स्मार्ट स्टोरेज सॉल्यूशंस डेवलप करना है। इससे सौर और पवन ऊर्जा को अधिक भरोसेमंद और ग्रिड-तैयार बनाया जा सकेगा।
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कंपनी के अनुसार, RE DevCo उसका सबसे महत्वपूर्ण ग्रोथ प्लेटफॉर्म मंच होगा। यह प्लेटफॉर्म भूमि अधिग्रहण, ग्रिड कनेक्टिविटी, सरकारी मंजूरियां, परियोजना विकास जैसे कार्यों को एकीकृत रूप से संभालेगा। सुजलॉन का दावा है कि यह भारत का पहला एकीकृत रिन्यूएबल एनर्जी को-डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म होगा। इसका मकसद परियोजनाओं की तैयारी और बाजार तक पहुंचने की गति को बढ़ाना है।
सुजलॉन ग्रुप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अजय कपूर ने कहा कि RE DevCo, Suzlon 2.0 का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन होगा। हमारा लक्ष्य FY31 तक 15 GW की ऑर्डर बुक और 3 GW निर्यात ऑर्डर हासिल करना है। अब दुनिया को सिर्फ क्लीन एनर्जी नहीं, बल्कि ऐसी क्लीन एनर्जी की जरूरत है जो भरोसेमंद तरीके से काम भी करे।