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टेलीकॉम कंपनियों ने ‘सोर्स कोड’ शेयर करने की शर्त का किया विरोध, भारत सरकार से नियमों में राहत की मांग

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यूरोपीय संघ ने उठाई चिंता, कंपनियों को आईपीआर और साइबर सुरक्षा जोखिमों की आशंका

Last Updated- March 27, 2025 | 10:40 PM IST
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वैश्विक दूरसंचार उपकरण विनिर्माताओं ने अपने सॉफ्टवेयर के ‘सोर्स कोड’ उपलब्ध कराने की शर्त का विरोध किया है। सरकार ने जो नियम तय किए हैं उनके अनुसार ये कंपनियां सॉफ्टवेयर के सोर्स कोड देने के बाद ही अपने उत्पाद स्थानीय बाजार में बेच पाएंगी। सरकार ने यह शर्त पूरी करने लिए समय सीमा बढ़ा दी है और अब वैश्विक दूरसंचार उपकरण विनिर्माता कंपनियों को इसके लिए इस साल 31 दिसंबर तक का समय दिया है।

यूरोपीय संघ (ईयू) के एक शीर्ष प्रतिनिधिमंडल ने भारत सरकार के साथ यह मुद्दा उठाया है और इस पर चिंता जाहिर की है। भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत के लिए यह प्रतिनिधिमंडल भारत आया था। संचार सुरक्षा प्रमाणन योजना के अंतर्गत सॉफ्टवेयर के सोर्स कोड के आकलन के लिए किसी तीसरे पक्ष की प्रयोगशाला में उसकी जांच अनिवार्य है। यह योजना वर्ष 2020 में अधिसूचित हुई थी। फिलहाल यह व्यवस्था वाई-फाई उपकरण, राउटर्स एवं ग्राहक परिसर उपकरण पर लागू है और इस साल की दूसरी छमाही में रेडियो पर भी यह लागू हो जाएगी।

सरकार के इस कदम का सबसे अधिक असर यूरोप की दूरसंचार कंपनियों पर हुआ है। उनका कहना है कि दुनिया में किसी अन्य देश में ऐसी व्यवस्था नहीं है और एक बार सोर्स कोड का खुलासा करने के बाद पूरी दुनिया में यह चलन शुरू हो जाएगा जिससे वैश्विक बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) के लिए जोखिम खड़ा हो सकता है। यूरोप के प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के समक्ष तर्क दिया कि संवेदनशील बुनियादी सोर्स कोड एक जगह रखने से साइबर हमलों का खतरा बढ़ जाएगा। कई कंपनियों को इस बात का डर सता रहा है कि सोर्स कोड प्रतिस्पर्द्धी कंपनियों के हाथ लग जाएगा जिससे उनके आईपीआर के लिए जोखिम बढ़ जाएंगे।

इस मुद्दे पर विरोध बढ़ने के बाद नैशनल सेंटर फॉर कम्युनिकेशन सिक्योरिटी (एनसीसीएस) ने अक्टूबर 2022 में वैश्विक दूरसंचार उपकरण बनाने वाली कंपनियों को अस्थायी राहत दी थी और उन्हें सोर्स कोड के बजाय ‘आंतरिक जांच रिपोर्ट’ सौंपने के लिए कहा। मगर फरवरी 2025 में सरकार ने अपना रुख बदल लिया और कहा कि यह अस्थायी राहत 31 दिसंबर, 2025 तक ही प्रभावी रहेगी। इस समय कंपनियां इस उद्घोषणा के बाद अपने उत्पाद बेच पा रही हैं कि वे इस साल के अंत तक सोर्स कोड से जुड़ी शर्त का पालन करना शुरू कर देंगी।

वैश्विक दूरसंचार उपकरण कंपनियों का कहना है कि वैश्विक सुरक्षा प्रक्रियाओं का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए उनके उपकरणों की व्यापक जांच की व्यवस्था पहले ही मौजूद है। उन्होंने कहा कि जीएसएमए की अगुआई में नेटवर्क इक्विपमेंट सिक्योरिटी एश्योरेंस स्कीम (एनईएसएएस) भी इस प्रक्रिया में शामिल है। एनईएसएएस दूरसंचार उपकरण सॉफ्टवेयर की जांच करने वाली थर्ड-पार्टी ऑडिटर है।

एनईएसएएस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यताप्राप्त साझेदारों एवं प्रयोगशालाओं (लैब) के साथ काम करती है और जीएसएमए एनईएसएएस ओवरसाइट बोर्ड के तहत उपकरण की जांच करती है। पूरी दुनिया में इसकी लैब हैं। कंपनियां भारत सरकार से मान्यताप्राप्त लैब में भी जांच करती हैं ताकि ग्राहकों को पूरी तरह संतुष्ट किया जा सके। मगर सोर्स कोड की अतिरिक्त मांग के वे खिलाफ हैं।

भारत में सोर्स कोड की मांग नई नहीं है। सरकार पहले भी दूरसंचार उपकरण कंपनियों को सोर्स कोड उपलब्ध कराने के लिए कहती रही है। वर्ष 2012 में चीन की कंपनी हुआवे और जेडटीई ने अपने सभी उत्पादों पर अपने सोर्स कोड सरकार को सार्वजनिक तौर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया था। भारत सरकार ने अमेरिकी संसद की एक समिति की उस रिपोर्ट की समीक्षा के बाद यह कदम उठाया था जिसमें कहा गया था कि चीन की इन दोनों कंपनियों के चीन की सरकार एवं सेना से गहरे ताल्लुकात हैं। हुआवे ने 2018 में सोर्स कोड उपलब्ध कराने की पेशकश की थी और इसे एक एस्क्रो अकाउंट में रखा था। मगर सरकार ने दोनों कंपनियों को भारतीय दूरसंचार कंपनियों को 5जी उपकरण बेचने की अनुमति देने से मना कर दिया।

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First Published - March 27, 2025 | 10:40 PM IST

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