भारती एयरटेल ने अपने नए ‘प्रायोरिटी पोस्टपेड’ सर्विस का बचाव करते हुए दूरसंचार विभाग (DoT) की एक समिति के सामने कहा है कि 5G नेटवर्क स्लाइसिंग पर आधारित यह सेवा नेट न्यूट्रैलिटी नियमों का उल्लंघन नहीं करती और न ही प्रीपेड ग्राहकों की सर्विस क्वॉलिटी को प्रभावित करती है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
संचार और सूचना प्रौद्योगिकी समिति की ओर से मांगे गए स्पष्टीकरण के जवाब में एयरटेल ने कहा कि अगर 5G की मेनस्ट्रीम सुविधाओं का उपयोग सेवाएं देने के लिए नहीं किया गया, तो इससे देश में 6G की संभावनाओं पर असर पड़ेगा।
एयरटेल ने अपने जवाब में कहा कि प्रायोरिटी पोस्टपेड को कंटेंट-न्यूट्रल तरीके से लागू किया गया है और यह TRAI व DoT के मौजूदा नियमों के पूरी तरह अनुरूप है। इसमें किसी भी एप्लिकेशन के लिए ब्लॉकिंग, थ्रॉटलिंग, कंटेंट आधारित प्राथमिकता, जीरो-रेटिंग या विशेष लाभ जैसी कोई व्यवस्था नहीं है।
एयरटेल ने 19 मई को ‘प्रायोरिटी पोस्टपेड’ प्लान लॉन्च किए थे। कंपनी का दावा है कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी पोस्टपेड ग्राहकों को लगातार बेहतर स्पीड मिलेगी। सूत्रों के अनुसार कंपनी ने अपने जवाब में कहा कि एयरटेल प्रायोरिटी फीचर किसी भी ग्राहक (चाहे वह प्रीपेड हो या पोस्टपेड) की सर्विस क्वॉलिटी को कम नहीं करता। भारती एयरटेल को भेजे गए सवाल का कंपनी की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
कंपनी ने कहा कि फिलहाल 5G नेटवर्क की कुल क्षमता का उपयोग व्यस्त समय में लगभग 38 प्रतिशत तक हो रहा है। इसमें पोस्टपेड ट्रैफिक की हिस्सेदारी केवल करीब 4 प्रतिशत है, जो ‘वर्चुअल टनल’ (स्लाइस) लागू होने के बाद लगभग 6 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
कंपनी ने कहा कि प्रीपेड और अन्य नॉन-प्रायोरिटी ट्रैफिक के लिए अब भी कुल क्षमता का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध रहेगा। इससे साफ है कि प्रायोरिटी पोस्टपेड सेवा प्रीपेड ग्राहकों की सेवा गुणवत्ता को प्रभावित नहीं कर सकती।