दूरसंचार नियामक इस धारणा की ओर झुकाव रखता दिख रहा है कि भारती एयरटेल की प्रायोरिटी पोस्टपेड योजनाएं नेट-न्यूट्रैलिटी मानदंडों का उल्लंघन नहीं करतीं। जानकार लोगों के मुताबिक इसके बावजूद भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) इन योजनाओं के विभिन्न बाजारों में क्रियान्वयन की निगरानी जारी रखे हुए है।
इस मामले से जुड़े दो लोगों के मुताबिक ट्राई की जांच में पाया गया कि 5जी स्लाइसिंग के माध्यम से पोस्टपेड उपयोगकर्ताओं को दी जा रही योजनाएं प्रीपेड उपयोगकर्ताओं की सेवा गुणवत्ता या अनुभव को संभावित रूप से प्रभावित नहीं करतीं।
पूरे प्रकरण से जुड़े एक व्यक्ति ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा, ‘मुद्दा यह था कि क्या योजना शेष 5जी ग्राहकों की गुणवत्ता को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर रही है और मूल रूप से ऐसा प्रतीत नहीं होता।’ उन्होंने कहा, ‘नेट-न्यूट्रैलिटी नियम तब लागू होते हैं जब सामग्री के आधार पर भेदभाव होता है जबकि यहां ऐसा नहीं है।’ एक अन्य व्यक्ति ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा, ‘नियम यह बताते हैं कि एक ही वर्ग के ग्राहकों के बीच भेदभाव होना चाहिए और अब तक कोई असंगति नहीं है।’
पहले व्यक्ति ने यह भी संकेत दिया कि चूंकि ट्राई ने यह सुनिश्चित कर लिया था कि योजनाएं सामग्री, मूल्य निर्धारण या गति के आधार पर भेदभाव नहीं करतीं इसलिए 2018 से लागू नेट-न्यूट्रैलिटी नियमों की समीक्षा किए जाने की संभावना कम है। सोमवार शाम तक ट्राई को भेजे गए प्रश्नों का कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ।
इस बीच एक व्यक्ति ने कहा कि मौजूदा पोस्टपेड और प्रीपेड योजनाओं द्वारा सभी दूरसंचार कंपनियों के माध्यम से दी जा रही बंडल्ड कंटेंट प्रचलित बाजार प्रथाओं जैसे मार्केटिंग, ग्राहक अधिग्रहण और ग्राहक बनाए रखने द्वारा संचालित होती हैं।
भारती एयरटेल ने 19 मई को अपनी प्रायोरिटी पोस्टपेड योजनाएं लॉन्च की थीं जिसके तहत उसने अपने सभी 2.9-3 करोड़ पोस्टपेड ग्राहकों को उन्नत किया और भारी भीड़भाड़ के बावजूद एक भरोसेमंद नेटवर्क की पेशकश की। इन योजनाओं को दूरसंचार विभाग, ट्राई और संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति की जांच के दायरे में लाया गया क्योंकि चिंता थी कि पोस्टपेड ग्राहकों का अनुभव प्रीपेड ग्राहकों की कीमत पर होगा, और योजनाओं में बंडल्ड कंटेंट शामिल था, जो संभावित रूप से नेट-न्यूट्रैलिटी का उल्लंघन कर सकता था।
प्रतिद्वंद्वी वोडाफोन आइडिया ने भी एयरटेल की नई 5जी स्लाइसिंग-आधारित योजनाओं पर सवाल उठाए और पिछले हफ्ते सोशल मीडिया पर नारा दिया- सबको समान नेटवर्क और हर व्यक्ति है प्रायोरिटी। एयरटेल ने इन योजनाओं का बचाव करते हुए कहा कि वे पूरी तरह नियमों के अनुरूप हैं। कंपनी ने अधिकारियों को लाइव नेटवर्क डेटा साझा करने और सेवा गुणवत्ता मानकों के लिए जवाबदेह रहने की पेशकश की।
एयरटेल ने सरकार से कहा, ‘एयरटेल का कार्यान्वयन ट्राई और दूरसंचार विभाग के सभी मानकों के अनुरूप है। यह कंटेंट निरपेक्ष है और इसमें किसी तरह की ब्लॉकिंग, प्राथमिकता आधारित व्यवहार या जीरो रेटिंग शामिल नहीं है।’
कंपनी ने कहा कि सेवा उसके प्रीपेड ग्राहकों (जो कुल 36.8 करोड़ ग्राहक आधार का 92 प्रतिशत हैं और राजस्व का 88 प्रतिशत योगदान करते हैं) के अनुभव को कम नहीं करती। सुनील भारती मित्तल समर्थित कंपनी ने 5जी स्लाइसिंग तकनीक को एकमात्र सिद्ध बड़े पैमाने पर मुद्रीकरण मॉडल बताया है,जो भविष्य के 6जी नेटवर्क की नींव भी है।
तकनीक के रूप में, 5जी स्लाइसिंग का मतलब है कि एक टेलीकॉम नेटवर्क में अलग-अलग हिस्से बनाए जाएं। जैसे कम विलंबता वाले तेज लेन या हमेशा जुड़ाव सुनिश्चित करने वाले समर्पित लेन। सिंगापुर, अमेरिका, ब्रिटेन और मलेशिया जैसे बाजारों में 5जी स्लाइसिंग आधारित सेवाएं पहले से मौजूद हैं।
कंपनी ने तर्क दिया कि व्यस्त समय में उसकी कुल 5जी क्षमता का उपयोग लगभग 38 प्रतिशत है। इसमें पोस्टपेड ट्रैफिक केवल 4 प्रतिशत है, जो प्राथमिकता पोस्टपेड के लिए आभासी टनल (स्लाइस) शुरू करने के बाद लगभग 6 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।